क्या कोरोना से बदल जाएगा फिल्मों की शूटिंग का तौर-तरीका?

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  सब-कुछ बदल जाता है। दिन रात में और रात दिन में बदलते हैं। मौसम चार भागों में बंट जाते हैं। सृष्टि का श्रृंगार है बदलाव। जो परिवर्तनशील है। 
  जैसे बचपन यौवन में बदलता है और यौवन बुढ़ापे में परिवर्तित हो जाता है। बुढ़ापा जिसे जीवन अभिशाप में बदल जाता है।उसे सम्पूर्ण जीवन या जीवनचक्र भी कहते हैं। यह वह फिल्म है जिसके निर्माता माता-पिता और निर्देशक इश्वर होते हैं। जिसमें सुख और दुख भी प्राकृतिक बदलाव दर्शाता है।
  जब जीवनलीला का चित्रण फिल्म उद्योग करता है तो शूटिंग का तौर-तरीका बदलना भी स्वाभाविक है। चूंकि कोरोना विश्व युद्ध ने मानव की सोच बदल दी है। लोगों को ज्ञान हुआ है कि एक सूक्ष्म अदृश्य शत्रु जीव अत्याधिक शक्तिशाली राष्ट्र और उनके द्वारा बनाए अनुबम इत्यादि विफल हो गये हैं। जिनके चित्रण दर्शाने के लिए फिल्मों की शूटिंग का तौर-तरीका बदलना निश्चित है।

इंदु भूषण बाली

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।