कारगिल

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chaganlal garg

वीर आल्हा छंद ||
छंद-लक्षण: जाति , अर्ध सम मात्रिक छंद, प्रति चरण मात्रा ३१ मात्रा, यति १६ -१५, पदांत गुरु गुरु, विषम पद की सोलहवी मात्रा गुरु (ऽ) तथा सम पद की पंद्रहवीं मात्रा लघु (।),

युद्घ कारगिल हिंद पाक का , शौर्य संघर्ष का है नाम !
जय निर्णायक वीर हमारे, लड़े लड़ाई को अविराम!
विजय ऑपरेशन नाम रहा, ध्वज यश फहराया संसार !
शौर्य युद्ध बड़ा भयानक था , शत्रु संहार अति विस्तार !!

भभक उठी थी विजय कामना, अरमानो का अति उन्माद !
पाक कुचलने की चिंगारी , जाग उठी जलते जल्लाद !
तीन मई निनानवे लाई , एक सूचना क्रोध महान !
चरवाहे ने भेद बताया , किया कारगिल कब्जा जान !!

पाँच मई को फिर धोखे से , तैयारी में मारे वीर !
भीतर नफरत के अंगारे , उठा विस्फोट धुआँ अधीर !
हुआ वायु सेना का हमला, युद्ध खदेड़ा पाकिस्तान !
धोखे बाज पाक का फिर से, खुला भेद जग में बदनाम !!

वीर देश के रिपु दल मारे, किया कारगिल रक्त ललाम !
आतंकी बनकर जो आये , किया सभी का काम तमाम !
पाक शिविर में रूदन बिखरा , अविरल था मचा कोहराम!
खून भरा हर एक चेहरा, प्राण मांगता करे सलाम !!

युद्ध वीर भारत को देखो , विजय पताका उच्च महान !
छब्बीस जुलाई निनानवे , गूँज उठा कीर्ति भरा गान !
वीर सैनिकों की जांबाजी, भरा माह दो का त्यौहार!
बीस वर्ष के बाद गर्व का , जाग उठा दिल मे अंबार !!

शुरुआत पाक की मक्कारी, बहा खून आई कब काम !
मांग रहे थे रहम युद्ध में , अल्ला अकबर थे नाकाम !
नमन देश के वीर सैनिकों, नत मस्तक हो करे सलाम !
डरा हुआ है पाक हमेशा , शौर्य दिव्य जग करे प्रणाम !!

#छगन लाल गर्ग विज्ञ
 
परिचय-
छगन लाल गर्ग “विज्ञ”! 
जन्मतिथि :13 अप्रैल  1954 
जन्म स्थान :गांव -जीरावल तहसील – रेवदर जिला – सिरोही  (राजस्थान ) 
पिता : श्री विष्णु राम जी 
शिक्षा  : स्नातकोतर  (हिन्दी साहित्य ) 
राजकीय सेवा :  नियुक्ति तिथि 21/9/1978 (प्रधानाचार्य, माध्यमिक शिक्षा विभाग, राजस्थान ) 
30 अप्रैल  2014 को राजकीय सेवा से निवृत्त । 
प्रकाशित पुस्तके :  “क्षण बोध ” काव्य संग्रह गाथा पब्लिकेशन,  लखनऊ  ( उ,प्र) 
“मदांध मन” काव्य संग्रह,  उत्कर्ष प्रकाशन,  मेरठ (उ,प्र) 
“रंजन रस” काव्य संग्रह,  उत्कर्ष प्रकाशन,  मेरठ (उ,प्र) 
“अंतिम पृष्ठ” काव्य संग्रह,  अंजुमन प्रकाशन,  इलाहाबाद  (उ,प्र) 
“तथाता” छंद काव्य संग्रह, उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ (उ.प्र.) 
“विज्ञ विनोद ” कुंडलियाँ संग्रह , उत्कर्ष प्रकाशन मेरठ (उ.प्र. ) । 
“विज्ञ छंद साधना” काव्य संग्रह, उत्कर्ष प्रकाशन!
साझा काव्य संग्रह – लगभग २५
सम्मान : विद्या वाचस्पति डाक्टरेट मानद उपाधि, साहित्य संगम संस्थान नईं दिल्ली द्वारा! विभिन्न साहित्यिक मंचो से लगभग सौ से डेढ सो के आस-पास! 
वर्तमान मे: बाल स्वास्थ्य  एवं निर्धन दलित बालिका शिक्षा मे सक्रिय सेवा कार्य ।अनेकानेक साहित्य पत्र पत्रिकाओ व समाचार पत्रों में कविता व आलेख प्रकाशित।
वर्तमान पता : सिरोही (राजस्थान )

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।