रिश्ता

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krishn

पूज्य पिता जी की बाहों में,
जीने का किरदार छिपा हैll

ममतामई माँ के *रिश्ते* में,
अमर प्रेम संसार छिपा हैll

बहिना के राखी धागों में,
पूजा पुण्य प्रणाम छिपा हैll

नमन वंदना करके देखो,
सच में चारों धाम छिपा हैll

पिता-पुत्र के *रिश्ते* में,
साहस त्याग निदान छिपा हैll

माता पुत्री के *रिश्ते* में,
प्रबल प्रेम प्रधान छिपा हैll

पति-पत्नी के भी *रिश्ते* में,
दोनों दिल की चाह छिपी हैll

दादा-दादी के *रिश्ते* में,
दर्द दुआ परवाह छिपी हैll

भाई-भाई में,बहिन-बहिन में,
जीवनभर का प्यार छिपा हैll

नाना-नानी में, मौसा-मौसी,
अति उत्तम उद्गार छिपा है॥

*रिश्ते* सभी सलामत रखना,
*रिश्तों* में परिवार छिपा हैll

*रिश्ते* में आदर अभिनंदन,
मंगल मंगलचार छिपा हैll

कहीं टूट न जाये *रिश्ते* ,
जीवन का आधार छिपा हैll

गंगा-जमुना, मथुरा-काशी,
पावन हरि का द्वार छिपा हैll

*कवि कृष्ण कुमार सैनी”राज”

दौसा,राजस्थान 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।