शेर ए इंदौर सुरेश सेठ नहीं रहें

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*अब शेर नहीं दहाड़ेगा,*
शेर ए इंदौर श्री सुरेश सेठ साहब ने दुनिया को कहा अलविदा…
इंदौर | नगर में सफेद शेर के नाम से मशहूर पूर्व केन्द्रीय मंत्री व पूर्व महापौर दैनिक इंदौर समाचार के संस्थापक श्री सुरेश सेठ ने 4 बजकर 10 मिनट पर मेदान्ता अस्पताल में अन्तिम श्वास ली |

श्री सेठ साहब का व्यक्ति सदैव से ही प्रेरणास्पद रहा है, इन्होंने राजवाड़ा को बचाने से लेकर तो लता ताई के गाने के लिए अड़ने तक के लिए सफेद शेर का कोई जोड़ नहीं था |

शेर-ए-इंदौर के नाम से पहचाने जाने वाले दबंग नेता सुरेश सेठ नहीं रहे। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। पूर्व मंत्री और इंदौर के महापौर रह चुके सुरेश सेठ ने 87 साल की उम्र में अंतिम सांस ली।

इंदौर की सड़कों पर स्ट्रीट लाइट लगाने का श्रेय सुरेश सेठ को जाता है। महापौर रहते हुए सुरेश सेठ ने शहर की चुनिंदा सड़कोंं पर स्ट्रीट लाइटें लगवाई थी। उसके पहले सड़कों पर लालटेन लगा करती थी। सेठ विधायक और मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी गिनती शहर के बेहद कर्मठ, ईमानदार नेताओं में होती थी। उन्होंने मजदूर आंदोलन की अगुवाई भी की थी। अपनी बेबाक शैली के चलते विरोधी भी उनकी प्रतिभा का लोहा मानते थे।

कुछ समय से वे बीमार चल रहे थे और निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

सुरेश सेठ के निधन की खबर मिलते ही अस्पताल और उनके घर परिचितों के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया है, इनमें कई कांग्रेस नेता शामिल हैं।

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matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।