मैं था कहाँ 

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nitesh upadhyay
मैं था कहाँ और कहाँ आ कर के बैठा हूँ
अपना सबकुछ किसी गैर पर लुटाकर के बैठा हूँ
उम्र सदियाँ दौर सब
जिसमें मुझको नजर आया था रब
उस अजनबी के  इंतजार में सबकुछ गवाकर के बैठा हूँ
कुछ भी फसाना था जो कभी तेरे मेरे उस इश्क का
उस इश्क की बस याद में  उम्र को बिताकर के बैठा हूँ
कुछ थी हँसी इन होंठों पर वो शबनम भी तू ले गई
गम ए बरसात के मेरे दिल को बस तू मौसम दे गई
इस लम्हे में भी तेरी मुस्कुराहट दिल में बचाकर के बैठा हूँ
मैं नहीं हो सकता किसी और इस बात पर तू गौर कर
एक मैं हूँ तेरा हर पहर ये बात जमाने को बताकर के बैठा हूँ
न वफा न जफा की उम्मीद है मुझको
हर दफा दिल खफा क्या बता मैं दूँ तुझको
इन बातों का दिल में बोझ भी उठाकर के बैठा हूँ

#नीतेश उपाध्याय

परिचय-

नाम- नीतेश उपाध्याय 
साहित्यिक उपनाम- लेखक नीतेश उपाध्याय

राज्य- मध्यप्रदेश 
शहर- दमोह
शिक्षा- स्नातक बी.एस.सी
कार्यक्षेत्र- शिक्षक एवं निर्देशक स्कूल के 
विधा – काव्य एवं गीत 
प्रकाशन- काव्य रंगोली पत्रिका में कविता,एवं devastro.in पर कविता का प्रकाशन

सम्मान- जीवन साहित्य से सम्मान, अखिल भारती से सम्मानित काव्य क्षेत्र में 
अन्य उपलब्धियाँ- कविताओ एवं खेल क्षेत्र में 
लेखन का उद्देश्य- सामाजिक सुधार एवं उत्साही जीवन पर लक्ष्य।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।