प्रेम एक आवेदन नहीं न ही कोई अनुरोध है वो मार्ग क्या जिसमें कठिनता न ही अवरोध है ईर्ष्या मिथ्या द्वेष जिसमें हो प्रेम नहीं  वो प्रतिशोध है प्रेम जीवन की सत्यता प्रदर्शित करता है प्रेम सैद्धांतिक है न कोई प्रयोग है पवित्रता निर्धारित करे जो भाग्य वो प्रेम है […]

मैं था कहाँ और कहाँ आ कर के बैठा हूँ अपना सबकुछ किसी गैर पर लुटाकर के बैठा हूँ उम्र सदियाँ दौर सब जिसमें मुझको नजर आया था रब उस अजनबी के  इंतजार में सबकुछ गवाकर के बैठा हूँ कुछ भी फसाना था जो कभी तेरे मेरे उस इश्क का […]

मेरी मोहब्बत को मेरी चाहत को उसने ऐन वक्त पर नामंजूर कर दिया कभी अपना बनाने की कसमें खाई देखो आज उसी ने मुझे खुदसे दूर कर दिया दर्द आसूँ सितम खामोशी से हमने सहे इन सब जख्मों को देकर भी मुझे बेवफा से मशहूर कर दिया यूँ तू हसरत […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।