जिनशासन

2 0
Read Time3 Minute, 15 Second
saket jain
आज श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर एक रचना, जो कि सुनील भैया जी शिवपुरी वाले की कथाओं के तर्ज पर आधारित है सादर प्रेषित है ।
जिनशासन की गौरवगाथा आज बताते हैं ।
श्रुत पंचमी पर्व की मंगल कथा सुनाते हैं ।।
सुनो जी जैनधर्म इतिहास ।
यासों होवे दृढ़ विश्वास ।।
निज को निज पर को पर जाने, तीन कषाय हरें,
श्री धरसेनाचार्य मगन निज वन में वास करें ।
वन में बैठे एक दिवस उनको विचार आया,
कालदोष से बुद्धि ह्रास का संकट भरमाया ।
ऐसे में श्रुत परम्परा का आगे क्या होगा,
शेष ज्ञान  को लिपिबद्ध अब से करना होगा ।
यही सोच मुनि अर्हद्बलि को संदेश भिजाते हैं ।
श्रुत पंचमी पर्व की मंगल कथा सुनाते हैं ।।
सुनो जी जैनधर्म इतिहास ।
यासों होवे दृढ़ विश्वास ।।
बोले भेजो दो मुनियों को योग्य शिष्य हों जो,
कथित परीक्षा सफल करें ऐसे हों वे दोनों ।
नाम सुबुद्धि और नरवाहन ये दोनों मुनिराज,
आकर बैठे विनय चितेरे श्रीगुरुवर के पास ।
हुई परीक्षा मंत्र सिद्धि कर सफल हुए मुनिराज,
स्व विवेक को जागृत रखकर किया उन्होंने काज ।
पुष्पदंत और भूतबलि संबोधन पाते हैं ।
श्रुत पंचमी पर्व की मंगल कथा सुनाते हैं ।।
सुनो जी जैनधर्म इतिहास ।
यासों होवे दृढ़ विश्वास ।।
गुरु से सुन सारे श्रुत को अंतस में फिर सींचा,
पुष्पदंत मुनिराज ने उसका प्रथम चित्र खींचा ।
एक सतत्तर गाथाओं की लिखी रूपरेखा,
जिसको आगे चलकर भूतबलि मुनि ने देखा ।
भूतबलि महाराज ने ही फिर सारा काम किया,
ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी तिथि को पूरण काज किया ।
तब से ही हम सब मिलकर यह पर्व मनाते हैं ।
श्रुत पंचमी पर्व की मंगल कथा सुनाते हैं ।।
सुनो जी जैनधर्म इतिहास ।
यासों होवे दृढ़ विश्वास ।।
श्री गुरुओं ने करुणा कर यह बात बताई है,
दूर दृष्टि थी उनकी सो जिनवाणी पाई है ।
अगर अभी भी हम इनका स्वाध्याय नहीं करते,
निष्फल फिर यह पर्व मनाना ऐसा क्यों करते ।
अतः कल नहीं आज अभी यह निर्णय करना है,
तत्त्वविचार और निर्णय पूर्वक जीना मरना है ।
इसमें ही तो जीवन की सुख राह बताते हैं ।
श्रुत पंचमी पर्व की मंगल कथा सुनाते हैं ।।
सुनो जी जैनधर्म इतिहास ।
यासों होवे दृढ़ विश्वास ।।
साकेत जैन शास्त्री ‘सहज’
जयपुर(राजस्थान)

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

करची की कलम

Fri Jun 7 , 2019
दुःखी होकर करची बोला, कलम से जमाना बीत गया जब छिलकर मुझे कलम बनाया जाता नित्य लिखने के लिए दवात में डूबोया जाता शब्दों की लेखनी को आकर्षक बनाने का कर्णधार मुझे बनाया जाता। फिर वक्त बदला और कलम तेरा जन्म हुआ मेरी महत्ता घटती गयी शब्दों की आकर्षकता, शालीनता […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।