विछोह की पीड़ा

Read Time0Seconds
Saurabh thakur
पता नही किस शहर में,
किस गली तुम चली गई।
मै ढूँढ़ता रह गया,तुम छोड़ गई ।
पता नही हम किस मोड़ पर
फिर कभी मिल पाएँगे ।
इस अनूठी दुनिया में फिर
किस तरह से संभल पाएँगे ।
पता नही तेरे बिन हम,
जी पाएँगे या मर जाएँगे ।
हम बिछड़ गए उस दिन,जिस दिन
तुम मुझसे मिलने वाली थी
मै तुमसे मिलने वाला था ।
इस अंधी दुनिया ने कभी
हमको समझा ही नही ।
काश समझ पाती दुनिया,
तो हम कभी बिछड़ते ही नही ।
प्यार करते थे हम तुमसे,
पर कभी कह ही न पाएँ ।
आज भी सोचता हूँ की,
काश वो दिन वापस लौट आए ।
बहुत समय लगा दिया हमने इजहार में ।
कब तक भटकेंगे हम तेरे इन्तजार में ।
हम बिछड़ गए थे उस दिन,जिस दिन,
तुम मुझसे मिलने वाली थी,
मै तुमसे मिलने मिलने वाला था ।

सौरभ कुमार ठाकुर 

बाल कवि और लेखक

मुजफ्फरपुर(बिहार)
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2019 के प्रारुप में

Sun Jun 2 , 2019
मातृ-भाषा, भारतीय भाषाओं के माध्यम व भाषा शिक्षण संबंधी बिंदु सभी मातृ-भाषा व भारतीय भाषा प्रेमियों को सादर नमस्कार ! यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एवं इसके वर्तमान सलाहकार मा. के. कस्तूरीरंगन जी की अध्यक्षता में […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।