हिन्दी के प्रचार और प्रसार में  मीडिया की भूमिका ~

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seema garga
हमारे भारत देश की राष्ट्रीय भाषा हिन्दीभाषा का गौरव होने के साथ ही हिन्दी विश्व की प्रमुख भाषा है |
हम भारतवासी 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाते हैं |
14 सितम्बर 1949 को देवनागरी में लिखी जाने वाली हिन्दी को भारत की राजभाषा होने का गौरव मिला था |
हिन्दी हमारे मीडिया, राजनीति, सिनेमा, पत्रकारिता, धार्मिकता, प्रवचन, फैशन आदि क्षेत्रों में जनमानस के बीच बोलचाल की सरल भाषा है | अनेकानेक भाषाओं के बीच भारत में एकता का परचम लहराती हमारी हिन्दी अब विदेशों में भी सिरमौर बन रही है | हमारे देश भारत में अनेक प्रदेश हैं किंतु चहुँओर हिन्दी बोलने और समझने वाला आम जनमानस रहता है हिन्दी सरल और उदार भाषा है | भाव विचारों के आदान प्रदान के द्वारा जनमानस का ह्रदय परिवर्तन तक देखा जाता है | जो मानव के मन मस्तिष्क को झकझोर कर आमूल चूल परिवर्तन ला सकता है |
इसे हम एक उदाहरण के द्वारा बहुत सुन्दर रूप से समझ सकते हैं ~
एक बार महात्मा बुद्ध अपने शिष्यों के साथ नगर भ्रमण पर निकले थे | एक जंगल से गुजरते हुये उन्हें एक कड़क आवाज सुनाई दी ~ ठहर जा!
कहाँ जाता है?
पीछे से आने वाली यह आवाज डाकू अंगुलिमाल की थी | महात्मा बुद्ध ने उसकी आँखों में झाँकते हुये कहा कि हाँ!मैं तो ठहर गया |
किंतु तू कब ठहरेगा?
महात्मा बुद्ध के उन शब्दों को सुनकर जैसे अंगुलिमाल के दिलो दिमाग को झकझोर डाला था | वह ऊपर से नीचे तक काँप उठा | अंगुलिमाल जैसे सोते से जागा उसे अपने द्वारा किये गये अमानुषिक कार्यों से अपराध बोध होने लगा था | उसके भीतर मानवीयता के गुणों की अनुभूति होने लगी | अंगुलिमाल महात्मा बुद्ध के चरणों पर गिर पड़ा | अंगुलिमाल ने डाकू जैसा वीभत्स कार्य छोड़कर महात्मा बुद्ध की शरण प्राप्त की |
शब्दों का, भावनाओं का विचारों का हमारे तन मन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है |
इन्हीं भाव विचारों को जानने समझने के लिए समाज को जनमानस को भाषा की आवश्यकता प्रतीत हुई | अपनी सरलता, शब्द गाह्ययता के कारण हिन्दी जनमानस के दिलों दिमाग पर विराजमान है | जहाँ अब से पहले अंग्रेजी भाषा का ही चहुँओर बोलबाला था | अब हमें हिन्दी में ही बहुत सारे पत्र, पत्रिकायें, आकाशवाणी ,दूरदर्शन के हिन्दी कार्यक्रम कार्यक्रम, वाटसअप, फेसबुक के साहित्यिक मंच ट्विटर, इन्सटाग्राम जैसे सोशल मीडिया के द्वारा हम सभी हिन्दी भाषा में ही लिखते और पढ़ते हैं | हिन्दी भाषा में लिखने वाले प्रतिष्ठित एवं नवोदित साहित्यिककारों को फेसबुक और वाटसअप जैसे सोशल मीडिया पर बहुतायत की संख्या में जान पहचान मिली है | यहाँ हम सभी आपस में एक दूसरे के द्वारा लिखित रचनाओं को  पढ़ते एवं उत्साहवर्धन करते हैं  |इन्हीं सोशल मीडिया के माध्यम द्वारा जहाँ आज लेखक अपनी किताबें अपनी रचनाओं को प्रकाशित कराने में सुविधा प्राप्त करता है | वहीं अनेकानेक प्रकाशकों को किताब प्रकाशन के लिए भी लेखकों की संख्या में बहुत इजाफा हुआ है | यह सब सोशल मीडिया का ही कमाल है जो इतनी बड़ी संख्या में लेखक और प्रकाशक को साहित्यिक मंच उपलब्ध है |हिन्दी भाषी लोगों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है | इन सोशल मीडिया के द्वारा विदेशों में बसे भारतीय जनता और देश में रहने वाले अपनों के बीच रिश्तों एवं प्रेम अलगाव की दूरियों को कम किया है |
इन सोशल मीडिया के संसाधनों द्वारा भारतवासी एवं विदेशी जनमानस आपस में जुड़ाव महसूस करते हैं |
आज विदेशों में बसे बच्चे  या नाती पोते, सोशल मीडिया के द्वारा ही घर बैठे आपस में रूबरू होकर बातें करते हैं | एक दूसरे के हालचाल जान सकते हैं | दुखदर्द बाँट सकते हैं | इसके साथ ही
कथा, कहानियों, फैशन, स्वास्थ्य, साहित्य, नारी मंच, बाल साहित्य आदि विषयों पर बहुत ज्ञानवर्धक और अच्छी पुस्तकों का संग्रह बाजार में उपलब्ध रहता है |
बच्चों की चंपक, नदंन, चंदामामा, चाचा चौधरी, विक्रम बेताल, बेताल पच्चीसी,बालमन को गुदगुदाने और प्रेरित करने वाली कथायें ज्ञानवर्धक पहेलियाँ, अनेक कामिक पुस्तकें .
महिलाओं के लिए सरिता, मुक्ता, कादम्बिनी, मनोरमा, गृहशोभा, मेरी सहेली जैसी अनेकानेक पुस्तकों को लोकप्रियता प्राप्त है |
आकाशवाणी, दूरदर्शन ने भी संगीत, मनोरंजन, समाचार, आचार विचार, कृषि दर्शन, शिक्षा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश के गाँव, शहर और कोने, कोने में पहुँच कर कार्य किया है |
1980में स्व. इंदिरा गांधी जी ने दूरदर्शन उपकरणों का संजाल देश के कोने, कोने तक पहुँचाया दूरदर्शन रेडियो, एफ एम जैसे संसाधनों ने हिन्दी के नये आयाम गढ दिये | याद कीजिये करीब 25, 30साल पहले जब दूरदर्शन पर रामानंद सागर का धार्मिक धारावाहिक रामायण का प्रसारण होता था तो गली मौहल्ले,सड़कें सूनी हो जाती थी, बाल, वृद्ध,युवा,बुजुर्गजन महिलायें, युवतियाँ सभी टीवी चैनल पर धारावाहिक देखने के लिए जुटे रहते थे | आधा घंटे के लिए जैसे सारी गतिविधियाँ थम जाती थी और सिया राम की प्रीत में डूबा जनमानस रामायण के आगे की किस्तों की प्रतीक्षा किया करता था | घर, घर में रामायण, महाभारत के चर्चें होते थे | उस समय के दौर में दूरदर्शन ने हिन्दी धारावाहिकों को प्रसारण द्वारा घर, घर में आम जनमानस को उद्वेलित और प्रेरित किया था | दूरदर्शन के द्वारा बढती हुई हिन्दी की लोकप्रियता ने निर्माताओं को हिन्दी भाषी कार्यक्रम बनाने और प्रसारण करने की होड़ सी लग गयी थी | एक के बाद एक ऐतिहासिक, धार्मिक धारावाहिकों की लहरों में भिगोते डूबोते घर, घर में सबकी पसन्द बन हिन्दी के प्रचार, प्रसार में मील का पत्थर साबित हुये थे |
यह सब निर्माता के संग हमारे मीडिया का ही कमाल था कि दूर, दूर से लोग प्रतीक्षारत रहते थे | फीचर फिल्मों, वृत्तचित्र, पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, पारिवारिक विषयों को लेकर बनाये गये धारावाहिक बेहद पसन्द किये गये |
आज के लाइव शो, कपिलदेव नाइट, डांस इंडिया डांस, सिंगिंग स्टार, कौन बनेगा करोड़पति, इंडियन आइड़िल जैसे टीवी शो प्रसिद्धि के चरम शिखर पर हैं | हिन्दी समाचार घर, घर में सबसे अधिक देखे सुने जाते हैं |  मीडिया हिन्दी की इस दौड को बेहतर बनाने के साथ ही निरन्तर गतिशील बना रहा है |
हिन्दी मीडिया के पंख लगाये सभी के अरमानों में रंग भर रही है |
हाँ देखो, हमारी प्यारी हिन्दी देश विदेश में छा रही है |
आज हमें अगर आगे बढ़ना है तो हिन्दी की छाँव में रहकर ही  हम उन्नति की ओर अग्रसर हो सकते हैं |
हिन्दी भाषा ने भी देश, विदेश में लोगों के दिलों दिमाग में अपनी गहरी पैठ बना ली है |
आज देश, विदेश में विख्यात हमारी हिन्दी भाषा का परचम चहुँओर लहरा रहा है |
नाम ~ सीमा गर्ग’ मंजरी’
वर्तमान पता ~ मेरठ(उत्तर प्रदेश )
राज्य ~ उत्तर प्रदेश 
शहर ~ मेरठ 
कार्यक्षेत्र ~ गृहणी हूँ 
विधा ~ कविता, गीत, लघुकथा, कहानी, लेख 
शिक्षा ~ हिन्दी आनर्स ग्रैजुएट 
लेखन का उद्देश्य ~ अपनी मातृभाषा हिन्दी में लेखन कार्य के द्वारा अपनी रचनाओं से सकारात्मक संदेश प्रसारित करना | अपनी मातृभाषा हिन्दी में रचकर मातृभाषा का गौरव बढाना |पाठक वर्ग को जागरूक करना | आदि.. 
परिचय ~ मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में रहती हूँ | लिखने 
पढने का शौक रखती हूँ |
अभी कुछ समय से अपने परिवार खासकर बच्चों के द्वारा प्रोत्साहित करने पर मैने लंबे अंतराल के बाद लिखना शुरू किया है | भले ही कोई डिग्री नहीं है मेरे पास, लेकिन जो भी लिखती हूँ दिल से लिखती हूँ | 
 
मैं” क्षितिज ~ व्हेयर ड्रीम्स मीट रियलिटी” साहित्यक ग्रुप की सदस्या हूँ | यहाँ मैने अनेक सम्मान को प्राप्त करते हुये अनेक प्रतियोगियों के बीच “नेशनल लेवल पोयट्री “की प्रतियोगिता में चुने गए सात प्रतिभागियों के बीच “चौथा स्थान “प्राप्त किया है |
 
साहित्यक मंच “आगमन कोलकाता “की आजीवन सदस्यता को ग्रहण किया है | यहाँ मैने विभिन्न प्रतिभाशाली कवियों के बीच “प्राइड आफ सेप्टेम्बर” सम्मान को प्राप्त किया है | मेरी कविता को “प्रथम स्थान” मिला | एवं अन्य अनेक सम्मान भी प्राप्त हुये हैं |
 
“काव्य रंगोली हिन्दी पत्रिका” में “साहित्य भूषण सम्मान” का सम्मान मिला है | 
 
“लोकजंग पेपर” में लघुकथायें,कविता भी प्रकाशित हुई हैं | 
 
अंकुर साहित्यिक पत्रिका में भी रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं | 
 
युवा प्रवर्तक बेव पोर्टल पर भी रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं | 
 
अग्रसत्ता पत्रिका में मेरी रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं |
विजय दर्पण टाइम्स मेरठ समाचार पत्र में मेरी रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं | 
 
श्री श्री रविशंकर जी के “आर्ट आँफ लिंविंग” की सदस्या हूँ | यहाँ से” टी, टी, पी कोर्स “को करके बच्चों को संस्कार और संस्कृति की शिक्षा देने के लिए प्रयासरत हूँ |
 
अपने समीप धार्मिक संस्था से जुडी हूँ | जहाँ अनेक” धार्मिक और सामाजिक “कार्यों को मिलजुलकर सम्पन्न किया जाता है | 
 
मेरा एकल काव्य संग्रह “भाव मंजरी” नाम से प्रकाशित हो रहा है | 
 
एक सांझा काव्य संग्रह ~पहाडी गूँज के नाम से वर्तमान अंकुर पत्रिका के सहयोग से जनवरी अंतिम में प्रकाशित होगा |
 
काव्य सागर यू टयूब पर कविता एवं कहानियों का प्रसारण होता रहता है |
 
काव्य मंजरी समूह में अनेक प्रतिभागियों के बीच मेरी कविता को सर्वश्रेष्ठ के लिए सम्मान मिला है | 
 
मेरा सांझा काव्य संकलन ~गाता रहे मेरा दिल प्रखर गूँज प्रकाशन के माध्यम से जनवरी में आने वाला है |
 
मेरा मुक्त छंद सांझा संग्रह प्रखर गूँज के माध्यम  फरवरी में प्रकाशित हो रहा है |
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।