मदरस डे :

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बच्चो की अच्छी देखभाल के लिए 105 साल पहले मदरस डे की शुरुआत हुई थी, अमरीका में एन जार्विस ने 1858 को “मदरस डे वर्क क्लब की स्थापना की गई थी, उनकी माता के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए उनकी पुत्री ने 1905 को एन की मृत्यु के बाद 1908 को वेस्ट वर्जीनिया में पहली बार मदरस डे मनाया गया था, उसके बाद 1914 को अमरीका के प्रमुख वुडरो विल्स ने देश भर में मदरस डे मनाने की घोषणा की थी, तब से पूरे विश्व में मई के दूसरे सन्डे को मदरस डे मनाया जाता है,
   बच्चो मे माँ के संस्कार होते हैं, जीजा बाई ने शिवाजी के जन्म के पहले जब माँ की कोख में थे तब उन्होने शिवाजी को संस्कार दिए गए थे, गर्भ में जब बालक होता है तब उसे सोलहवा संस्कार गर्भ संस्कार दिया जाता है, माँ का प्यार अपने बच्चो के प्रति अद्भुत होता है, किडनी ट्रांसप्लांट के वक्त हर चौथी किडनी अपनी माता के द्वारा डोनेट की जाती है,
मेघालय में एक गांव में माँ अपने बच्चे को सिटी की धुन से बुलाती है, यहा सभी व्यक्ति का नाम सिटी की एक अलग धुन होती है, अपने बच्चो का जीवन संगीत से संवार ने की तरकीब यहा कि सभी माता ओ मे हे, सिटी की यह धुन ही बच्चे का नाम बन जाता है, बच्चे को उसके सामान्य नाम से तब बुलाया जाता है कि जब वो नाराज हो, ये गांव का नाम इस लिए वहिस्‍लिंग विलेज नाम से जाना जाता है, यह गांव की आबादी 600 लोगो की है, ये लोग आदिवासी हे,
  लंदन में 100 साल की माता अपने 82 वर्षीय अपने पुत्र को समालती है, बच्चा कितना भी बड़ा हो जाय लेकिन वो अपने बच्चे को बालक की तरह ही समालती है, माँ के हृदय में, मगज और किडनी में जीवन पर्यंत अपने बालक का अंश रहता है
“आज मे जिंदा हू हे माँ, मुजे कुछ भी नहीं होगा,
मेजब घर से निकलता हू, दुआ भी साथ चलती है”
   मून वर राणा -संकलन :डॉ गुलाब चंद पटेल
 यशोदा मैया अपने लाल का केसा बचाव करती है, जब गाँव की सभी महिलाएं यशोदा को फरियाद लेकर आती है कि आपके कान्हा ने हमारे घर से मक्खन चुराया है और हांडी भी तोड़ दिया है तब यशोदा मैया कहती हैं कि मेरा लाल तो यहा ही है, वो कही गया ही नहीं, लेकिन जब कान्हा को बुलाते हैं तो कान्हा के मुह पर मक्खन की बूंद लगी हुई थी, तब मैया कहती हैं कि आप उसे ले जाओ और जो चाहे वो सजा दे दो, सभी महिलाएं खुश होकर चली जाती है,
 रामायण में राम के वनवास का प्रसंग से सभी जानकार होगे, कैकई ने राजा दशरथ से अपने वचन पूरे करने के लिए कहा गया, कैकई ने राजा दशरथ को बचाया था, उनके रथ का पहिया निकल ने की तैयारी में था तब कैकई ने अपनी अंगुली रखकर पहिया निकल ने से बचाया था तब राजा ने कैकई को वर मांगने के लिए कहा गया था, वो वर की मांग उसने इस लिए कि, अपने बेटे भरत को राजमुकुट पहनाकर राजा के रूप में देखना चाहती थी, उसने भरत को राज गद्दी पर बिठाने की मांग की, राम को वनवास दिया जाय, एक माँ अपने बच्चे के लिए क्या सोचती है, राम ने वन वास स्वीकार कर लिया था,
  माँ प्रेम का सागर है,
एक घटना माँ का प्यार समझने के लिए यहा पेश किया गया है,
एक लड़का अपनी प्रेमिका को बहुत प्यार करता था, उसे देखे बिना और उसे मिले बिना वो रह नहीं सकता था, उसने अपनी प्रेमिका को कहा कि तुम हमसे शादी कर लो, तब उस लड़की ने अपने प्रेमी का इम्तिहान लेना तय किया, उसने अपने प्रेमी को कहा कि, तुम अपनी माँ का कलेजा लेकर आओ तो ही मे तुमसे शादी करूंगी, तब वो लड़का बिना कुछ सोचे अपनी माँ के पास गया और छुरी से अपनी माँ के पेट में से कलेजा काट कर ले आया, वो कलेजा लेकर निकला था तब रास्ते में उसे ठोकर लगी, वो गिर गया, तब अपनी माँ ने देख लिया था, तब माँ ने अपने बेटे को कहा कि, मेरे लाल तुम्हें चोट तो नहीं आई न? एक माँ का प्यार अपने बच्चे के प्रति कितना होता है वो इस घटना से मालूम होता है, माँ अपने बच्चे के लिए अपने जी की भी परवाह नहीं करती है और उसे कुछ न तकलीफ हो उसका ध्यान रखती है,
  आज मदरस डे पर अपनी माँ के चरणों में सिर झुकाकर वंदन करता हूं!
माँ के लिए एक रचना :
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स्त्री माँ के रूप में:-
❤❤❤❤❤
शास्त्रों में कहा गया है कि
स्त्री माँ के रूप में गुरु होती है,
स्त्री की उपमा माँ, बहन और पत्नी भी होती है
माँ से बड़ा इस दुनिया में भगवान भी नहीं है
बंगले, गाड़ी और एश की दुनिया में,
माँ से बड़ा कोई सम्मान नहीं है
खूब कमा लो नाम और दौलत
चाँद तारे भी भले ही छु लो तुम
दिन दौगूने रात चौगुनी
चाहे कितने ही फूलो तुम
बिना दुआओ से जननी की
ये सब तो आसान नहीं है
माँ अनंत से अनंत सा आगे
उस से बड़ी पहचान नहीं
चेहरे से वो रोग समझ ले
आंखो से मन की बातें
एक तुम्हारी खा शी पर
जाने वो कितनी रातें जग रही
भेज दिया उसे वरूढ़ढाश्रम में
इससे बड़ा अपमान नहीं है
तू क्या साबित करेगा? सज्जन
माँ की असीम क्रूपा ओ को
केसे जान पाएगा तुम माँ की
अनगिनत क्रूपा ओ को?

#गुलाबचन्द पटेल

परिचय : गांधी नगर निवासी गुलाबचन्द पटेल की पहचान कवि,लेखक और अनुवादक के साथ ही गुजरात में नशा मुक्ति अभियान के प्रणेता की भी है। हरि कृपा काव्य संग्रह हिन्दी और गुजराती भाषा में प्रकाशित हुआ है तो,’मौत का मुकाबला’ अनुवादित किया है। आपकी कहानियाँ अनुवादित होने के साथ ही प्रकाशन की प्रक्रिया में है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन(प्रयाग)की ओर से हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मुंबई,नागपुर और शिलांग में आलेख प्रस्तुत किया है। आपने शिक्षा का माध्यम मातृभाषा एवं राष्ट्रीय विकास में हिन्दी साहित्य की भूमिका विषय पर आलेख भी प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय(दिल्ली)द्वारा आयोजित हिन्दी नव लेखक शिविरों में दार्जिलिंग,पुणे,केरल,हरिद्वार और हैदराबाद में हिस्सा लिया है। हिन्दी के साथ ही आपका गुजराती लेखन भी जारी है। नशा मुक्ति अभियान के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी दवारा भी आपको सम्मानित किया जा चुका है तो,गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल ने ‘धरती रत्न’ सम्मान दिया है। गुजराती में‘चलो व्‍यसन मुक्‍त स्कूल एवं कॉलेज का निर्माण करें’ सहित व्‍यसन मुक्ति के लिए काफी लिखा है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।