उसूल गये है लोग

Read Time2Seconds
cropped-cropped-finaltry002-1.png
जीवन मे उगा बबूल गये है लोग
जिना ही अब जैसे भूल गये है लोग
अमन प्यार वफा सब है बस नाम के
बात बात पर चला त्रिशूल गये है लोग।
भिड है झूंड है पर इंसान एक नही
खूदगर्जी मे खूद ही को भूल गये है लोग।
जात धर्म के नाम पर बट गया है आदमी
आखिर बना ये कैसा उसूल गये है लोग।
बोली प्रेम की पशू पक्षी भी समझते है
बेकार की भाषा मे उलझ फिजूल गये है लोग।
हर शास्त्र ने दिया है पैगामे मोहब्बत *अश्क*
हिंसाकर कौन सा धर्म कबूल गये है लोग।

नाम- संजय तांडेकर

साहित्यिक नाम- संजय अश्क
शिक्षा-बीएससी
 पता- पुलपुट्टा(तिरोडी)
जिला-बालाघाट मप्र
प्रकाशन-तेरी मोहब्बत के अश्क और दिल की गहराईयों मे तुम
लेखन का उद्देश्य- जनचेतना
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

वकील साहब

Sat May 25 , 2019
उसी शहर में राजेश अपनी प्रेमिका के साथ रह रहा था, जिसमें उसकी पत्नी रश्मि कई वर्षों से अपने तीन बच्चों के साथ उससे अलग रह रही थी। वह विषय-वासना तृप्ति की भावना लिए आज काफी दिनों के बाद पत्नी से मिलने यकायक आ पहुँचा था। पत्नी की दुखती रग […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।