उसूल गये है लोग

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जीवन मे उगा बबूल गये है लोग
जिना ही अब जैसे भूल गये है लोग
अमन प्यार वफा सब है बस नाम के
बात बात पर चला त्रिशूल गये है लोग।
भिड है झूंड है पर इंसान एक नही
खूदगर्जी मे खूद ही को भूल गये है लोग।
जात धर्म के नाम पर बट गया है आदमी
आखिर बना ये कैसा उसूल गये है लोग।
बोली प्रेम की पशू पक्षी भी समझते है
बेकार की भाषा मे उलझ फिजूल गये है लोग।
हर शास्त्र ने दिया है पैगामे मोहब्बत *अश्क*
हिंसाकर कौन सा धर्म कबूल गये है लोग।

नाम- संजय तांडेकर

साहित्यिक नाम- संजय अश्क
शिक्षा-बीएससी
 पता- पुलपुट्टा(तिरोडी)
जिला-बालाघाट मप्र
प्रकाशन-तेरी मोहब्बत के अश्क और दिल की गहराईयों मे तुम
लेखन का उद्देश्य- जनचेतना

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।