क्या कुछ कहें

Read Time0Seconds

sanjay

पल पल तरसते थे,
उस पल के लिए।
वो पल ही रुका,
कुछ पल के लिए।
सोचा था उसे जिंदगी का,
हसीन सपना बना लेंगे।
पर क्या करे वो पल ही,
रुका कुछ पल के लिए।।

प्यार तो हर कोई करता है।
क्या प्यारको कोई समझता है।
तीन अक्षर का शब्द क्या कहता है ?
कितने लोग इसको समझता है।
प्यार को दिखाया नही जाता।
दिल में मेंहसूस किया जाता है।
जो दिल से मेंहसूस करते है।
और उसकी भावनाओ को समझते है/
सही अर्थो में वो ही प्यार करते है।।

परस्थितियां अनुकूल हो तो,
सब कुछ अच्छा होता है।
परस्थितियां विपरीत हो तो,
सब कुछ बदल जाता है।
सही योध्दा वो होता है,
जो विपरीत परस्थितियो को,
अपने अनुकूल कर के,
जंग को जीत लेता है।
वही सच्चा योध्दा कहलाता है।।

कितनो को तुम समझाओगे ।
कितनो को तुम मनाओगे।
ये दुनिया बड़ी जालिम है।
अपने बनकर अपनोको छलते है।
दोस्त होकर भी दुश्मनी निभाते है।
ऊपर से तो अपने बने रहते है।
पर अंदर से जड़ें को खोदते है।।

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

राजेश शर्मा बने जिला मोटिवेटर

Tue May 21 , 2019
भवानीमंडी| राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय सूलिया में कार्यरत अध्यापक राजेश कुमार शर्मा को नवोदय क्रांति परिवार भारत का झालावाड जिला मोटिवेटर बनाया गया है।    नवोदय क्रांति परिवार के संस्थापक संदीप ढिल्लो ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने व सरकारी स्कूलों के प्रति आम जनता को जागरूक […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।