श्रमिक तेरी कहानी

0 0
Read Time1 Minute, 40 Second

aashutosh kumar

श्रमिक के श्रम का
कब करोगे सम्मान
जबकि उनके परिश्रम
पर ही टिका है देश का मान।

कल-कारखाने हो
या हो खेत खलिहान
श्रमिक के श्रम बिन
सब बंद और बंजर समान।

सडक रेल या हवाई सफर
श्रम के बिन सब लचर
श्रमिक की तो बात निराली
अपने श्रम से रफ्तार बढा डाली।

इनके त्याग और बलिदानो से
रौनक होते है सारा जहाँ
फिर क्यों भूख और घूप में तपकर
शरीर पर फटे रहते कपडे।

छाले इनके पैरो के
हाथो में भी ठेले है
स्वास्थ्य और कुपोषण
तो ये बचपन से झेले हैं।

दिखता नही फिर भी काम
तपती घूप मे भी न आराम
जीवन से थका हारा
भूख मिटाने निकल जाता बेचारा।

हर सुबह की नई किरणों से
आस जगती है
शाम होते होते
पुनः लौट जाती है
सपनो के महल में भी
भूख और जरूरत नजर आती है।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जानिए

Wed May 1 , 2019
जानिए स्वयं को स्वयं से मानिए स्वयं को स्वयं से आत्मस्वरूप को निहारिए मैं कौन हूँ , यह जानिए क्या स्वरूप है मेरा? इस देह से क्या नाता है मेरा? देह तो पंचतत्व है,मिटनी है आत्मा ज्योतिबिंदू है,टिकनी है पर आत्मा को तराशना होगा शांति,धैर्य, सेवा से तापना होगा आत्मा […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।