श्रमिक तेरी कहानी

Read Time0Seconds

aashutosh kumar

श्रमिक के श्रम का
कब करोगे सम्मान
जबकि उनके परिश्रम
पर ही टिका है देश का मान।

कल-कारखाने हो
या हो खेत खलिहान
श्रमिक के श्रम बिन
सब बंद और बंजर समान।

सडक रेल या हवाई सफर
श्रम के बिन सब लचर
श्रमिक की तो बात निराली
अपने श्रम से रफ्तार बढा डाली।

इनके त्याग और बलिदानो से
रौनक होते है सारा जहाँ
फिर क्यों भूख और घूप में तपकर
शरीर पर फटे रहते कपडे।

छाले इनके पैरो के
हाथो में भी ठेले है
स्वास्थ्य और कुपोषण
तो ये बचपन से झेले हैं।

दिखता नही फिर भी काम
तपती घूप मे भी न आराम
जीवन से थका हारा
भूख मिटाने निकल जाता बेचारा।

हर सुबह की नई किरणों से
आस जगती है
शाम होते होते
पुनः लौट जाती है
सपनो के महल में भी
भूख और जरूरत नजर आती है।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जानिए

Wed May 1 , 2019
जानिए स्वयं को स्वयं से मानिए स्वयं को स्वयं से आत्मस्वरूप को निहारिए मैं कौन हूँ , यह जानिए क्या स्वरूप है मेरा? इस देह से क्या नाता है मेरा? देह तो पंचतत्व है,मिटनी है आत्मा ज्योतिबिंदू है,टिकनी है पर आत्मा को तराशना होगा शांति,धैर्य, सेवा से तापना होगा आत्मा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।