हमारा नेता कैसा हो-“चुनाव नेताजी का

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shivankit tiwari

एक बात,एक सवाल,एक मुद्दा,एक विषय और एक प्रश्न जो हम हर पाँच सालों के बाद जनता से पूछते है और जनता स्वत: बताती है कि हमारा नेता कैसा हो ?

भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश जहाँ नेता चुनने का अधिकार केवल जनता को प्राप्त होता है और जनता ही यह तय करती हैं की हमारा नेता कैसा होना चाहिये ?
हमारे जेहन में एक प्रश्न जो बार-बार बड़ी तेजी से उभर कर आता है वह सिर्फ और सिर्फ चुनाव के मौसमों में ही स्पष्ट रूप से नजर आता है क्योंकि तब बात अपने नेता को चुनने की होती है कि हम देश के विकास को नई रफ़्तार देने के लिये कैसे नेता का चयन करे?
क्योंकि यह प्रश्न हमारे देश की प्रगति और समृद्धि का होता है।
वर्तमान दशा की अगर बात करें तो हमे ये भी नही पता की हम मतदान किस लिये करने जा रहे है और हमे कैसे नेता का चयन करना चाहिये। हमारे देश के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका नेता की होती है जो की देश के प्रगति में नीव की तरह होता है जिस पर सारे देश की जिम्मेदारियों का बोझ होता है जिसका चुनाव जनता के द्वारा किये गये मतदान से होता है।
हमारे द्वारा किये गये एक-एक मत से देश के प्रगति पथ की एक-एक कड़ी प्रशस्त होती जाती है। हमारे सारे मुद्दे जो कि हमारे देश से जुड़े हुये है और जो देश के विकास के लिये अतिआवश्यक कदम है वो सारे कार्यो की पूर्ति सिर्फ एक अच्छा नेता ही कर सकता है इसलिये हमे ऐसे नेता का चयन करना चाहिये जो कि हमारे देश को एक नई दिशा और एक नई ऊँचाई प्रदान कर सके,
बिना किसी लालच के हमारे देश का और देश से जुड़ी समस्त समस्याओं का समाधान कर सके और देश के विकास में सदैव तत्परता से आगे आये।
हमको ऐसे जनप्रतिनिधि का चयन करना चाहिये जो जनता को जाने,जनता की भावनाओं को समझ कर जनता की समस्याओं का यथाउचित निवारण कर सकें,जो हमारे देश एवं देश के लोगों का सम्मान करें और देश के संविधान के तहत लोगो को न्याय दिला सकें।
देश के हित की बात करे,देश की भलाई के मुद्दों पर बात करें। देश को समस्याओं से मुक्त बनाने की कवायद पर अडिग रहें।
हमारे वास्तविक मुद्दे जो की अच्छी शिक्षा,स्वास्थ्य,सुरक्षा,
बिजली,पानी और सड़के है,इन मुद्दों गम्भीर मुद्दों पर गम्भीरता के साथ काम करें और इन पर बारीकी से सुधार करें। साथ ही साथ हमारे देश की पुरातात्त्विक और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजनें और उनकी मरम्मत करवाने पर विशेष ध्यान दे।
हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यताओं और परंपराओं को जीवंत रखने हेतु समय-समय पर विशेष आयोजन करायें और लोगों में इसके प्रति जागरूकता जगाये।
हमें ऐसे नेता का चयन करना चाहिये जिसमें नेतृत्व करने की क्षमता हो जो समयानुसार निर्णय लेने की कला में पूर्णतः परिपक्व हो और देश की खातिर सदैव अपने सारे कामों को पीछे छोड़ सर्वप्रथम देश को प्रधानता दे,फिर देश की जनता को और उनसे जुड़ी तकलीफ़ों पर शीघ्रतापूर्वक कार्य करें।
ध्यान रखें हम नेता नहीं बल्कि देश के भविष्य का चयन कर रहे हैं जो देश के विकास के पथ को एक नया जीवन देने वाला है इसलिये ऐसा प्रतिनिधि का चयन करें जो देशहित के लिये पूरी तरह सही है जो,देश के विकास के लिये पूरी तरह दृढ़प्रतिज्ञ है।
और इसके लिये आपको घर से निकल मतदान केंद्र तक जाना होगा और ऐसे ही नेता को मतदान करना होगा,तो घर से बाहर निकल कर मतदान करने अवश्य जायें और देश की प्रगति का आप भी हिस्सा बनें और सभी को मतदान करने के लिये प्रेरित और जागरुक अवश्य करें।
मतदान के लिये नया नारा:-
“जागो जनता दिखाओं क्षमता होकर नक्कालों से सावधान।
अपना अधिकार जान,अच्छे नेता की कर पहचान,इस बार सभी करों मतदान।।”
#शिवांकित तिवारी ‘शिवा’
परिचय–शिवांकित तिवारी का उपनाम ‘शिवा’ है। जन्म तारीख १ जनवरी १९९९ और जन्म स्थान-ग्राम-बिधुई खुर्द (जिला-सतना,म.प्र.)है। वर्तमान में जबलपुर (मध्यप्रदेश)में बसेरा है। मध्यप्रदेश के श्री तिवारी ने कक्षा १२वीं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है,और जबलपुर से आयुर्वेद चिकित्सक की पढ़ाई जारी है। विद्यार्थी के रुप में कार्यरत होकर सामाजिक गतिविधि के निमित्त कुछ मित्रों के साथ संस्था शुरू की है,जो गरीब बच्चों की पढ़ाई,प्रबंधन,असहायों को रोजगार के अवसर,गरीब बहनों के विवाह में सहयोग, बुजुर्गों को आश्रय स्थान एवं रखरखाव की जिम्मेदारी आदि कार्य में सक्रिय हैं। आपकी लेखन विधा मूलतः काव्य तथा लेख है,जबकि ग़ज़ल लेखन पर प्रयासरत हैं। भाषा ज्ञान हिन्दी का है,और यही इनका सर्वस्व है। प्रकाशन के अंतर्गत किताब का कार्य जारी है। शौकिया लेखक होकर हिन्दी से प्यार निभाने वाले शिवा की रचनाओं को कई क्षेत्रीय पत्र-पत्रिकाओं तथा ऑनलाइन पत्रिकाओं में भी स्थान मिला है। इनको प्राप्त सम्मान में-‘हिन्दी का भक्त’ सर्वोच्च सम्मान एवं ‘हिन्दुस्तान महान है’ प्रथम सम्मान प्रमुख है। यह ब्लॉग पर भी लिखते हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-भारत भूमि में पैदा होकर माँ हिन्दी का आश्रय पाना ही है। शिवांकित तिवारी की लेखनी का उद्देश्य-बस हिन्दी को वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठता की श्रेणी में पहला स्थान दिलाना एवं माँ हिन्दी को ही आराध्यता के साथ व्यक्त कराना है। इनके लिए प्रेरणा पुंज-माँ हिन्दी,माँ शारदे,और बड़े भाई पं. अभिलाष तिवारी है। इनकी विशेषज्ञता-प्रेरणास्पद वक्ता,युवा कवि,सूत्रधार और हास्य अभिनय में है। बात की जाए रुचि की तो,कविता,लेख,पत्र-पत्रिकाएँ पढ़ना, प्रेरणादायी व्याख्यान देना,कवि सम्मेलन में शामिल करना,और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति पर ध्यान देना है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।