सौतेली बेटी

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omprakash kshatriy

” बाबा ! ऐसा मत करिए. वे जी नहीं पाएंगे,” बेटी ने अपने पिता को समझाने की कोशिश की.

” मगर, हम यह कैसे बरदाश्त कर सकते हैं कि हमारी बेटी अलग रीतिरिवाज और संस्कार में जीए. हम यह सहन नहीं कर पाएंगे. इसलिए तुम्हें हमारी बात मानना पड़ेगी.”

” नहीं बाबा ! मैं आप की बात नहीं मान पाऊंगी. मैं अब नौकरी पर लग चुकी हूं. उन के सुखी रहने के दिन अब आए है. उन्हें नहीं छोड़ सकती हूं.”

पर, पिताजी नहीं माने, ” तुम्हें हमारे साथ चलना होगा. अन्यथा हम मुकदमा लगा देंगे. आखिर तुम हमारी संतान हो ?”

” आप नहीं मानेगे, ” बेटी की आंख में आंसू आ गए. वह बड़ी मुश्किल से बोल पाई, ” बाबा ! यह बताइए, जब आप ने दो भाई और चार बेटियों में से मुझे बिना बच्चे के दंपत्ति को सौंप दिया था, तब आप का प्यार कहां गया था ?” न चाहते हुए वह बोल गई, ” मेरे असली मातापिता वहीं है.”

” वह हमारी भूल थी बेटी, ” बाबा ने कहा तो बेटी उन के चरण स्पर्श करते हुए बोल उठी, ” बाबा ! मुझे माफ कर दीजिएगा. मगर, यह आप सोचिएगा, यदि आप मेरी जगह होते और आप के जैविक मातापिता आप को जन्म देने के बाद किसी के यहां छोड़ देते तो आप ऐसी स्थिति में क्या करते ?” कहते हुए बेटी आंसू पौंछते हुए चल दी.

बेटी की यह बात बाबा को अंदर तक कचौट गई. वे कुछ नहीं बोल पाए. उन का हाथ केवल  आशीर्वाद के लिए उठ गया.

#ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश'

परिचय : ओमप्रकाश क्षत्रिय का उपनाम `प्रकाश` है। आप पेशे से शासकीय विद्यालय में सहायक शिक्षक हैं।आपका जन्म-२६ जनवरी १९६५ का हैl आपने शिक्षा में योग्यता के तहत बी.ए. ३ बार और एम.ए. ५ विषयों में किया हुआ है। श्री क्षत्रिय का निवास-मध्यप्रदेश के रतनगढ़(नीमच) में हैl लेखन विधा में आप बाल कहानी, लेख,कविता तथा लघुकथा लिखते हैं। विशेष उपलब्धि यही है कि,२००८ में २४,२००९ में २५ व २०१० में १६ बाल कहानियों का ८ भाषाओं में प्रकाशन हुआ है। आपको २०१५ में लघुकथा के क्षेत्र में सर्वोत्कृष्ट कार्य के लिए जय-विजय सम्मान प्राप्त हुआ है। हिंदी के साथ ही अन्य भाषाओं से भी आपको प्रेम है।

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।