लेखिका साहित्य संस्थान का 29 वां वार्षिक समारोह सम्पन्न

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 दिनांक 17 फरवरी ।
राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान का 29 वां वार्षिक समारोह कनोडिया कॉलेज के तत्वाधान में 17 फरवरी को कॉलेज सभागार में प्रोफेसर डॉ०सुदेश बत्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
सह सचिव रेनू शर्मा ने बताया कि इस सम्मान समारोह का शुभारंभ अक्षिणी
भटनागर के सरस्वती वंदना गायन के साथ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ।
संस्थान की अध्यक्ष डॉ जयश्री शर्मा ने सभी का स्वागत करते हुए आज के दिन को विशेष बताया व पुलवामा में शहीद हुए हमारे सैनिक बंधुओं के लिए निःशब्द होते हुए 2 मिनट मौन रखवाया।
अध्यक्ष प्रोफेसर सुदेश बत्रा जी(साहित्य साधिका एवं प्रमुख शिक्षविद ,मुख्य अतिथि प्रमुख साहित्यकार एवं वेलफेयर सोसायटी अलवर की अध्यक्ष एडवोकेट श्री राजश्री अग्रवाल,  तथा विशिष्ट अतिथि डॉ०महेंद्र सुराणा पूर्व (IAS) के साथ डॉ०जयश्री शर्मा,सुधीर उपाध्याय, डॉ०रेखा गुप्ता,डॉ०सुषमा शर्मा व रेनू शब्दमुखर ने वागमणि सम्मान से क्षमा चतुर्वेदी कोटा को ,कर्मश्री सम्मान से जयपुर निवासी स्नेहप्रभा परनामी को,वेणु सम्मान से शशि मंगल, बेंगलोर को, श्रीमती नलिनी उपाध्याय स्मृति सम्मान से माधुरी शास्त्री जी जयपुर को, तथा श्रीमती सुमन मेहरोत्रा सम्मान से राज चतुर्वेदी जी  को श्रीफल,शॉल, स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर सभी सम्मानित साहित्यकारों ने अपने आपको गौरवान्वित बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्ष श्री सुदेश बत्रा जी ने नारी शक्ति, परिवार ,भाषा और साहित्य आदि विभिन्न सामाजिक सामाजिक मुद्दों पर विचार करते हुए प्रेरणादायी उद्बोधन दिया।
मुख्य अतिथि राजश्री अग्रवाल ने एडवोकेट होने के नाते चिंताजनक
सामाजिक परिस्थितियों  विश्लेषण किया व
 उम्मीद की कि साहित्यकार समाज को अपने कार्य  से एक नई दिशा देंगे।
विशिष्ट अतिथि महेंद्र सुराणा सही साहित्य सृजन की प्रेरणा देते हुए हम सभी को आज की आवश्यकता हिंदी भाषा को संरक्षित करने की है ,बताया।
अंत में संस्थान की उपाध्यक्ष डॉ०रेखा गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ०धर्मा यादव व रेनू शब्दमुखर ने किया।
#रेनू शर्मा शब्दमुखर
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।