मानवता का आहावन

Read Time0Seconds

करे उन पशु पक्षियों का ध्यान,जो भूख से बिलख रहे |
यही मानवता का धर्म है,हम इस पर सब अडिग रहे ||

“जियो और जीनो दो ” यही तो मानवता का धर्म है |
हिंसा करना जीवो की,यह तो मानवता का अधर्म है ||

आया है धर्म संकट,इन परिस्थितयो मानव कैसे निभाये |
खुद भी खाये और दूसरो को भी ऐसे में भोजन खिलाये ||

सकंट यह थोड़े समय का,यह भी टल जायेगा |
जीवित रही मानवता नया सबेरा भी आयेगा ||

घड़ी है परीक्षा मानव की,इसमे सबको पास होना है|
अगर करे ध्यान सबका,पास जरूरी सबका होना है ||

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

1 0

matruadmin

Next Post

सुंदरता क्या..

Wed Apr 8 , 2020
कभी उन्होंने देखा ही नही, मुझे उस नजर से। जिसकी मैं उनसे, चाहत रखती हूँ। हूँ खूबसूरत तो क्या, जब उनकी निगाहें। मुझे पर ठहरती नहीं। तो क्या जरूरत ऐसे, रूप और यौवन का ? चंदन सा सुगन्धित मेरा वदन। उनको पास न लपता है। और न ही उनके दिलमें, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।