सफर मीलों का……

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sanjay dr.
राही हूँ इस सफ़र का,
तो हिस्सा हूँ किसी क़ाफ़िले का,
मंज़िल मेरी मुझे कहीं नज़र न आई,
सफ़र तय कर आया मीलों का॥
दुनिया की भीड़ में शामिल हूँ,
अलग से मेरी कोई  पहचान नहीं,
ख़ुद से बेख़बर दौड़ रहा हूँ वो दौड़,
जिसका कोई अवसान नहीं॥
पैरों तले कुचले जाने का एक अदृश्य-सा, भय बैठा है मन में,
एक भेड़चाल चले जा रहा हूँ,
ख़ुद की इच्छाओं का
कोई भान नहीं॥
असफलता से डरता हूँ इसलिए,
हिस्सा बन गया  बुज़दिलों का,
मंज़िल मेरी मुझे कहीं नज़र न आई, सफ़र तय कर आया मीलों का॥
शामिल होने को इस अनजाने मेले में,
ख़ुद से ही फ़ासले हो गए हैं
पहचानने को अनजानी सूरतें,
बरस ख़ुद से ही मिले हो गए हैं॥
एक ख़्वाब जो हक़ीक़त
में कहीं था ही नहीं,
उसके पीछे भाग रहा हूँ।
मंज़िल जो है ही नहीं,
उसे पाने की चाह में
अपनों से ही गिले हैं॥
सुना न आह दिल की आवाज़ कभी,
हिस्सा बन गया हूँ झमेलों का।
मंज़िल मेरी मुझे कहीं नज़र न आई,
सफ़र तय कर आया मिलों का॥
                                                                           #डॉ.संजय यादव
परिचय : डॉ.संजय यादव राजस्थान के झुंझनूं जिले के पचेरी छोटी में रहते है। शिक्षा में अजमेर से एमबीबीएस किया है। वर्तमान में दिल्ली में कार्यरत हैं।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।