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bharat malhotra
दूर होकर भी मेरे दिल के बेहद पास लगती है
हज़ारों सूरतों में वो सूरत-ए-खास लगती है
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मिल जाए तो जीने का मज़ा आ जाए मुझको भी
बिना उसके मुझे ये ज़िंदगी वनवास लगती है
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वो मेरे साथ चल रही है डाल के बाहें बाहों में
झूठी है मगर कितनी हसीं ये आस लगती है
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बताओ तो यही हैं क्या मरीज़-ए-इश्क के लक्षण
नींद आती नहीं शब भर भूख न प्यास लगती है
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तरबतर तन-बदन हो जाता है मेरा खुशबुओं से
उसके आने से पतझड़ भी मुझे मधुमास लगती है
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#भरत मल्होत्रा

परिचय :– 
नाम- भरत मल्होत्रा 
मुंबई(महाराष्ट्र)
शैक्षणिक योग्यता – स्नातक 
वर्तमान व्यवसाय – व्यवसायी 
साहित्यिक उपलब्धियां – देश व विदेश(कनाडा) के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों , व पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
सम्मान – ग्वालियर साहित्य कला परिषद् द्वारा “दीपशिखा सम्मान”, “शब्द कलश सम्मान”, “काव्य साहित्य सरताज”, “संपादक शिरोमणि”  
झांसी से प्रकाशित “जय विजय” पत्रिका द्वारा ” उत्कृष्ट साहितय सेवा रचनाकार” सम्मान एव 
दिल्ली के भाषा सहोदरी द्वारा सम्मानित, दिल्ली के कवि हम-तुम टीम द्वारा ” शब्द अनुराग सम्मान” व ” शब्द गंगा सम्मान” द्वारा सम्मानित  
प्रकाशित पुस्तकें- सहोदरी सोपान 
                         दीपशिखा 
                         शब्दकलश 
                         शब्द अनुराग 
                         शब्द गंगा 
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