ये जो कंगूरे चमकते शान से

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narendr pal
ये जो कंगूरे चमकते शान से आज़ाद हो,
नींव के हे पत्थरों तुमको नमन है देश का।
भारती माँ पर यहाँ जब भी कोई खतरा हुआ,
अपने तन का आखिरी तत्पर लहू कतरा हुआ।
प्रार्थना हो या अजानें या कोई उपदेश हो,
तुम्हारी पूजा रही कि खैरियत में देश हो।
देवता तुम ही यहां तुम ही नया वरदान हो,
देह के हे मन्दिरों तुमको नमन है देश का।
तेज आंधी में अटल तुम और अखण्डित ज्योत हो,
घोर अंधियारों में कर्तव्यों का तुम उद्योत हो।
ताण्डवों सम हो समंदर या हवा विपरीत हो,
पर्वतों-सा हो खड़ा रहने की तुम एक रीत हो।
काल की लहरों में भी तुम सामने महाकाल हो,
आँधियों के धीवरों तुमको नमन है देश का।
नींद हमको दी तुम्हारी रात को है जागकर,
घर में खुशियां दी हमें परिवार तुमने त्यागकर।
ईद और दीवाली पर झूमती यहाँ टोली रही,
रक्त में खुद की रंगी तुम्हारी हर होली रही।
खुद में खारापन लिए तुमने लुटाई मोतियाँ,
ज्वार के हे सागरों तुमको नमन है देश का।
 #नरेन्द्रपाल जैन
उदयपुर (राजस्थान)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।