दृष्टिकोण

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asha jakad

दो भाई थे, जिनकी  उम्र 12 और 10 वर्ष  थी ।उनकी  मां का नाम  सुधा था।एक दिन वे अपनी माता  से बोले मां हम बगीचे में  खेलने जायें ? माता  ने प्रसन्न होकर  उन्हें बगीचे में  खेलने की  अनुमति दे दी ।दोनों  भाई खुशी- खुशी  बगीचे में खेलने गये।थोड़ी देर बाद बड़ा भाई रोते हुए  घर आया  ।सुधा ने पूछा  क्या हुआ बेटा?
अरे मम्मी  वहाँ  तो गुलाब  में  कांटे  लगे हुए  हैं इसलिए  मेरा मन  दुखी ।हो गया।तभी छोटा भाई    हंसते हुए  आया ।सुधा बोली क्या बात है बेटा  तुम बहुत खुश हो ? वह बोला  अरे माँ वहाँ    रंगबिरंगे गुलाब  और उनकी  खुशबू  से मेरा मन प्रसन्न हो गया ।
मुस्कुराती हुई  सुधा बोली  देखो बेटा वस्तु  एक ही है ,बगीचे  में  गुलाब के फूल । तुम गुलाब की सुगंध  और सुन्दरता  को  देखकर  खुश हुए और तुम्हारे  बडे भाई  ने  गुलाब  में  लगे कांटों  को देखा और दुखी  हो गया ।।जो लोग किसी भी  वस्तु के  अच्छे  रूप को देखकर खुश होते  हैं  ऐसे  लोग सकारात्मक  सोच रखते है और  जो किसी   वस्तु  के बुरे  रूप को  देखकर दुखी होते हैं  ऐसे लोग  नकारात्मक सोच रखते हैं ।सकारात्मक  सोच  वाले अपने  जीवन  में हमेशा  आगे  बढते हैं, मुश्किलों के आने पर हताश नहीं  होते   बल्कि  हिम्मत से  सामना  करते हैं ।नकारात्मक सोच वाले छोटी  सी  मुसीबत आने पर हताश  हो जाते हैं और।जीवन में  असफल  रहते है।  अतः हमें हमेशा  सकारात्मक  सोच रखनी चाहिए ।

#आशा जाकड 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।