बेटियां होगी सुरक्षित

Read Time2Seconds

drushti

एक अख़बार में निविदा विज्ञापन,

दहेज़ के दानव के विनाश हेतु

चाहिए एक बाण..

ऐसी निविदा पढ़ने के बाद

दिल को हुआ आराम।

वर्तमान परिदृश्य में,

बहुएं जली-जलाई जा रही..

ऐसे हादसों के कारण गांवों  के

कुएं की चरखियां,घट्टियों की आवाजें,

ख़त्म होती जा रही।

बाजारों में फ्रेमों के,कब्र के और पत्थरों के,

दाम यकायक बढ़ते जा रहे..

सूने घर और आँचल में कैसे छुपे बच्चे

छुपा-छाई का खेल वो खोते जा रहे..

रिश्तों में कड़वाहट-लालची युग का

विष घुलता जा रहा।

लगने लगा जैसे  दहेज़ के लालची,

दानवों का दायरा बढ़ता जा रहा..

बढ़ते हुए दायरों को न रोक पाने का,

कारण यह भी हो सकता है

कलयुग में बाण चलाना आता नहीं,

या लोग डरपोक बन भागते जा रहे।

निविदा की तिथियां बढ़ती जा रही,

अब संशोधनों के साथ..

दहेज़ के दानवों के विनाश हेतु,

चाहिए अब तरकशों से भरे बाण..

इंतजार है,कोई तो आएगा खरीदने

तभी ख़त्म हो सकेगी,

दहेज़ के दानवों की विनाशलीला..

और बेटियां होगी हर घरों में

सुरक्षित।

                                                                           #संजय वर्मा ‘दृष्टि’

परिचय : संजय वर्मा ‘दॄष्टि’ धार जिले के मनावर(म.प्र.) में रहते हैं और जल संसाधन विभाग में कार्यरत हैं।आपका जन्म उज्जैन में 1962 में हुआ है। आपने आईटीआई की शिक्षा उज्जैन से ली है। आपके प्रकाशन विवरण की बात करें तो प्रकाशन देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाओं का प्रकाशन होता है। इनकी प्रकाशित काव्य कृति में ‘दरवाजे पर दस्तक’ के साथ ही ‘खट्टे-मीठे रिश्ते’ उपन्यास है। कनाडा में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के 65 रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता की है। आपको भारत की ओर से सम्मान-2015 मिला है तो अनेक साहित्यिक संस्थाओं से भी सम्मानित हो चुके हैं। शब्द प्रवाह (उज्जैन), यशधारा (धार), लघुकथा संस्था (जबलपुर) में उप संपादक के रुप में संस्थाओं से सम्बद्धता भी है।आकाशवाणी इंदौर पर काव्य पाठ के साथ ही मनावर में भी काव्य पाठ करते रहे हैं।

 

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

क्षत-विक्षत हो हिन्दी रोती...

Thu Mar 23 , 2017
क्या गति कर डाली है हिन्दी की हिंदुस्तान में, क्षत-विक्षत हो हिन्दी रोती इंग्लिश के कूड़ेदान में। इंग्लिश यहाँ संभ्रांतों की अब भाषा समझी जाती है, हिन्दी हर एक सभा में अब जाने से कतराती है। पहन मातृभाषा का चोला दर-दर की ठोकर खाती है, गैरों की है क्या बिसात,अपनों […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।