तुम मिले 

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omprakash lovanshi
तुम मिले
और
मेरी जिंदगी में आ गये,
मैं तुम्हारे लिए ही
स्टेटस लगाता हूँ
ताकि तुम
मेरी फीलिंग को समझ सके,
तुम कहीं बार मेरे मैसेज को
अनदेखा करते हो,
फिर भी मैं तुम्हें
मैसेज करता हूँ,
तुम बिना गुड नाईट किये
सो जाते हो,
फिर भी मैं
गुड नाइट बोलता हूँ !
और सुबह जब तुम उठते हो
तो हमेशा मेरा गुड मॉर्निंग
वाला मैसेज मिलता है,
फिर तुम इसका
जवाब भी देते हो !
Dear crush
अब तो समझो -ना
क्या अब भी नादान हो ?
शायद तुम्हें तो
तड़पा कर मजा आता होगा,
शायद तुम अनजान हो अभी
मैंने अपना बना लिया तुमको,
तुम इसे वन साइड लव मानो
या पागलपन समझो!
पर मैं सच कह रहा हूँ
अपना मानता हूं तुमको. . ! !
परिचय 
नाम- ओम प्रकाश लववंशी
साहित्यिक उपनाम- ‘संगम’
वर्तमान पता- कोटा (राजस्थान )
राज्य- राजस्थान 
शहर- कोटा 
शिक्षा-  बी.एस. टी. सी. , REET 2015/2018, CTET, RSCIT, M. A. हिन्दी , B. Ed. 
कार्यक्षेत्र- अध्ययन, लेखन, 
विधा -मुक्तक, कविता , कहानी , गजल, लेख, निबंध, डायरी 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।