*किताबों में — लिखो यादें*

Read Time0Seconds

shobha sharma
कुछ अपनी निशानियाँ भी लिख दो
कोरे पृष्ठों में कुछ चित्रकारी कर दो,
सुख-दुख के क्षणों को इनमें लपेट दो
इन किताबों में तितलियाँ समेट दो ।।

लोग थक हार कर लौट आएंगे जब
रास्ते में  बिछी कहानियां पाएंगे तब
भूली बिसरी यादों को शुष्क हाथों से
सहला नम हो जाएँगे तब आँखों से ।।

झरोखे हो जाते रोशनारे कुछ यादोंसे
झिलमिल लड़ियाँ उभर आती तारों से ,
चाँद भी निकल चमक जाता बादलों से
सूरज ने यूँ भर लिए हाथ आफताब से ।।

हर लफ्ज उठ खड़ा होगा नए लिहाज में
लकीरों को समेटता रंगों के लिबास में ,
लड़खड़ाई थी लेखनी आई नए अंदाज में
खुशियों की सौगात सजा दो आगाज में ।।

भर दो कोरे पटल की गागर को सागर से
चुनकर मुक्तक भंडार,ज्ञान के खजानो से
आवरण पृष्ठ पर बिछा देना सौंदर्य धारों के
भोर की विभोर में नृत्य करे पंछी यादों के ।।

        श्रीमती शोभा शर्मा
शिक्षा :: बी.ए.–हिन्दी साहित्य , एम. ए.-अर्थशास्त्र – समाजशास्त्र ।
      भोपाल (मध्यप्रदेश)
प्रमुख – विधा ::– हिन्दी कविताएँ ,मुक्तक ,क्षणिकाऐं , मुक्त – गीत ।
अन्य विधाऐं ::– आलेख ,लघुकथा ,विभिन्न प्रमुख कवियों के काव्य पर आधारित कविताएँ ,एवं समीक्षात्मक काव्य सृजन ।
अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ ::– मालवी भाषा में  ::— गीत – कविताएँ , मालवी भाषा में –“” मालवा वृत्तांत “” किताब ।
बुन्देलखंडी भाषा में ::– गीत ,कविताएँ ।
आकाशवाणी बैतूल में एंकर —
गीत ,कविताओं का प्रसारण ।
आकाशवाणी भोपाल से प्रसारित कविताएँ  ।
दूरदर्शन भोपाल में क्षेत्रीय – मालवी भाषा में गीत प्रसारण ।
पुस्तक प्रकाशन : –  शीर्षक —“” मालवा – वृत्तांत “”
प्रकाशन वर्ष — 2018 

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

*कसम बचपन की*

Thu Oct 4 , 2018
कितने अच्छे थे वे दिन और कितने सच्चे थे हम बात बात में खाते थे “विद्या रानी” की कसम।। झूठ सांच के न्यायालय में न्यायाधीश बन जाते थे और झूठ बोलने वाले को “माँ की कसम” खिलाते थे।। कसम चढ़े तो डर जाए मन  फिर युक्ति से जाए उतारी  “सड़ी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।