राष्ट्रीय कवि संगम का प्रांतीय अधिवेशन एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न

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राष्ट्रीय कवि संगम का प्रांतीय अधिवेशन एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न

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जम्मू |राष्ट्रीय कवि संगम की जम्मू कश्मीर इकाई का प्रांतीय अधिवेशन आज के एल सहगल हाल, जम्मू में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि संगम के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल जी ने कार्यक्रम की अध्क्षता की जबकि जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाशा अकैडमी के अतिरिक्त सचिव डा अरविंद्र सिंह अमन मुख्य अतिथि थे। बरिश्ठ साहित्यकारा और जम्मू कश्मीर हिन्दी अकादमी और राष्ट्रीय कवि संगम जम्मू कश्मीर की संरक्षिका श्रीमती नीरू शर्मा, श्री भूपेंद्र कौशिक जी, संस्थापक ट्रस्टी राष्ट्रीय कवि संगम, श्री ओ. पी. शर्मा जी, अध्यक्ष जम्मू कश्मीर सैंटर फार क्रिएटिव आर्टस इस अवसर पर सम्माननीय अतिथि थे। श्री केवल कुमार केवल ने सभी अतिथियों का विधिवत स्वागत् किया।
प्रथम सत्र में विचार मंथन, चर्चा परिचर्चा, अथिथियों के वक्तव्यों एवं सम्मान समारोह के साथ सम्पन्न हुआ। इसमें बशिष्ट अथतिथियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर यशपाल निर्मल को हाल ही में साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए मुन्शी प्रेमचंद साहित्य सम्मान 2018 से सम्मानित होने पर संगम की ओर से अभिनंदन और सम्मान किया गया।
दूसरे सत्र में कवियों ने अपनी कविताएं सुनाई। कवि गोश्ठी में भाग लेने वाले कवियों में मनोहर विजय (लुधियाणा), सर्वेश मिश्रा (वाराणसी), धर्मपाल शर्मा (रियासी), मोहिंदर शर्मा (भांबला) ओ पी शाकिर, रत्न भारद्वाज, रशपाल वर्मा, केवल कुमार केवल (अखनूर), यशपाल निर्मल (छम्ब-ज्यौड़ियां), सुनील मनी (कठुआ), बलराम सैनी (हरियाणा), नीरू शर्मा, प्यासा अंजुम, विद्या रत्न आसी, शाम तालिब, विनोद कुमार, भगवती देवी, प्रो राज कुमार, मंजीत सिंह कामरा , जंग वर्मन, नीलम वर्मा, अमनप्रीत कौर, ईशा बल्गोत्रा, नम्रता देवी, योगिता बख्शी, संदीप सैंडी, तरुण शर्मा, ममता शर्मा, महाराज कृष्ण बफादार, सोनिया उपाध्याय, बिंदिया रैना टिक्कू, लोकेश चंद्र (जम्मू) और डा रत्न बसोत्रा (बिलावर) प्रमुख थे।
तीसरे सत्र में सभी कवियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन यशपाल निर्मल ने किया। और धन्वाद प्रस्ताव केवल कुमार केवल ने प्रस्तुत किया।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।