यह पुरानी हवेली उसके लिये यातना गृह से कम नहीं है..मानों किसी बड़े गुनाह के लिये आजीवन कारावास की  कठोर सजा मिली हो ..  ऐसा दंड कि ताउम्र इस बदरंग हवेली के चहारदीवारी के पीछे उस वृद्ध को सिसकते एवं घुटते हुये जीवन व्यतीत करना है..यहाँ से तो उसकी […]

खोखले हो गए परिवार , चर गई दीमक रिश्तों को .. सह कुटुंब का अस्तित्व कहां गया ? दूर कहीं किताबों में … या बड़े -बूढ़ों की यादों में.. पहले एक ही छत के नीचे , एक ही चूल्हे पर , पकता था प्यार ! अगाध स्नेह… जो झलकता था […]

कल -कल करती अविरल जल की धारा… पर्वत से झरती पावन धारा… पशु -पक्षियों की प्यास बुझाती , प्रकृति का सुंदर श्रृंगार करती ! स्वच्छ ,निर्मल ,निश्चछल ,चंचल , बहती जाती … झाग बनाती जैसे दुग्ध धारा कल कल……………. आकुल -व्याकुल -सी हो रही , कोई काव्य रचने को मचल […]

बोते हैं हम अपना भविष्य बच्चों में, देते हैं  खाद -पानी और वातावरण । ताकि बन सकें वे अच्छे इंसान जीवन में! हम सोचते हैं वे  होकर बड़े लग जाएंगे हमारी सेवा में, क्योंकि हमने बोया था अपना भविष्य अपने बच्चों में । हम उनसे पूर्ण समर्पण हैं चाहते, हम […]

माँ के प्यार का न है कोई जवाब ! न ही उसकी कोई कीमत न हिसाब !! माँ पूर्ण शब्द है ! ग्रंथ है ,महाविद्यालय है ! यह मंत्र बीज है ,हर सृजनता का आधार है “माँ “!! जिसकी कोई उपमा न दी जा सके उसका नाम है “माँ” !! […]

जज्बात कभी कुछ इस तरह उभरते हैं। करने को बयां उनको अल्फाज नहीं मिलते हैं। जब उठती है दिल में कसक कोई तो दिल बेकाबू हो उठते हैं। नही मानता ये दिल किसी रस्म कोई बंधन किसी रिवाज को बस जो है अपने मन में वही करने को मचल उठते […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।