आरक्षण की तलवार

Read Time4Seconds

rupesh kumar

करता हूं अनुरोध आज मैं,भारत की सरकार से,
प्रतिभाओं को मत काटो,आरक्षण की तलवार सेl

वर्ना रेल पटरियों पर जो,फैला आज तमाशा है,
जाट आन्दोलन से फैली,चारों ओर निराशा हैl

अगला कदम पंजाबी बैठेंगे,महाविकट हड़ताल पर,
महाराष्ट्र में प्रबल मराठा,चढ़ जाएंगे भाल परl
राजपूत भी मचल उठेंगे,भुजबल के हथियार से,
प्रतिभाओं को मत काटो,आरक्षण की तलवार सेl
निर्धन ब्राम्हण वंश एक दिन,परशुराम बन जाएगा,
अपने ही घर के दीपक से,अपना घर जल जाएगाl

भड़क उठा गृह युध्द अगर,भूकम्प भयानक आएगा,
आरक्षणवादी नेताओं का,सर्वस्व मिटाके जाएगाl
अभी संभल जाओ मित्रों,इस स्वार्थ भरे व्यापार से,
प्रतिभाओं को मत काटो,आरक्षण की तलवार सेl
जातिवाद की नहीं,समस्या मात्र गरीबीवाद है,
जो सवर्ण है पर गरीब है,उनका क्या अपराध हैl
कुचले दबे लोग जिनके,घर में न चूल्हा जलता है,
भूखा बच्चा जिस कुटिया में,लोरी खाकर पलता हैl
समय आ गया है उनका, उत्थान कीजिए प्यार से,
प्रतिभाओं को मत काटो,आरक्षण की तलवार सेl
जाति गरीबी की कोई भी,नहीं मित्रवर होती है,
वह अधिकारी है जिसके घर,भूखी मुनिया सोती हैl
भूखे माता-पिता,दवाई बिना तड़पते रहते हैं,
जातिवाद के कारण,कितने लोग वेदना सहते हैंl
उन्हें न वंचित करो मित्र,संरक्षण के अधिकार से,
प्रतिभाओं को मत काटो,आरक्षण की तलवार सेll

                                                                          #रुपेश कुमार

परिचय : चैनपुर ज़िला सीवान (बिहार) निवासी रुपेश कुमार भौतिकी में स्नाकोतर हैं। आप डिप्लोमा सहित एडीसीए में प्रतियोगी छात्र एव युवा लेखक के तौर पर सक्रिय हैं। १९९१ में जन्मे रुपेश कुमार पढ़ाई के साथ सहित्य और विज्ञान सम्बन्धी पत्र-पत्रिकाओं में लेखन करते हैं। कुछ संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मतलब के यार

Wed Apr 5 , 2017
सतरंगी सपनों की दुनिया, आज लगे बेमानी.. अपने ही जब गैर बने, तो दुनिया लगे बेगानीll रस्ते चलते साथी मिलते, कितने जाने पहचाने.. वक्त पड़े इनका जब देखो, बन जाते अंजानेll हैं मतलब के यार सभी, न इनको करना याद कभी.. जो पल में साथ बनाए कहीं, पर साथी पर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।