धर्मान्तरण” या  “धर्म में अंतर”

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rinkal sharma
सुबह के अख़बार से लेकर रात के समाचार तक, पूरे दिन में एक ना एक बार एक शब्द कानों में सुनाई पड़ ही जाता है – धर्मान्तरण।  देश के हर कोने से एकाध जगह  सुनाई दे ही जाता है कि फलां फलां जगह इतने लोगों ने अपना धरम परिवर्तन किया। क्या है ये धर्मान्तरण ? एक धर्म से दूसरे धर्म को अपना लेना , क्या यही है धर्मान्तरण।  या फिर इसके पीछे का सच कुछ और ही है ?
सत्ता के लालची लोगों द्वारा फैलाया जा रहा – लालच का ज़हर है ये “धर्मान्तरण”।  हाँ, कुछ  लोग शायद इसे, “घर वापसी “का  नाम देते रहे है। क्या नाम बदल लेने से , धर्मान्तरण के पीछे छुपा हुआ सत्य छुप सकता है ? लालच का जो  ज़हर आज मानवों के मन में भरा जा रहा है , क्या वो कभी  निकल सकता है ? ऐसे बहुत से प्रश्न एक आम आदमी से लेकर , बड़े बड़े बुद्धिजीवियों के मन में ज़रूर उठते होंगे।
इतिहास के पन्नों को अगर हम पलट कर देखें तो पता चलता है कि आज  से पहले भी ब्रिटिश शाशनकाल में  और मुग़ल साम्राज्य के अधीन इस तरह की घटनाये होती रही हैं।   प्राचीन  काल में भी लोगों की मज़बूरियों का फायदा उठाते हुए , ज़बरन  उनसे उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता था । प्राचीनकाल से आधुनिककाल तक समाज में कोई खास परिवर्तन नहीं आया है। इसी साल  जनवरी २०१८ में  रामनगर स्थित श्याम आदर्श विद्यालय के मैदान में धर्मांतरण को लेकर क्षेत्र में हड़कम्प मच गया। ईसाई मिशनरी से जुड़े कुछ लोग आसपास के लोगों को बुलाकर ईसाई धर्म के बारे में बता रहे थे।धर्मांतरण व मारपीट के चलते  थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। यही नहीं २८ जुलाई २०१८ को दुमका जिले में धर्मान्तरण के आरोप में आदिवासियों की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय परिसर पर धरना एवं प्रदर्शन किया। ८ मई २०१८ को  जूना बिलासपुर में  धर्मान्तरण को लेकर युवकों ने हंगामा मचाया और पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान हंगामे की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। इन सब आकलन  से यही लगता है कि गरीब और भूखे लोगों की दीन-हीन परिस्तिथियों का  सियासती लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाना शायद कोई नयी बात नहीं है हमारे समाज में।
लेकिन अब प्रश्न ये उठता है कि चाहे वह हिन्दू धर्म हो या इस्लाम  , सिख धर्म हो या ईसाई। ऐसा कौन सा धर्म है जो मानव को ही , मानव का शोषण करने की शिक्षा  देता है ? या फिर , किसी भी मानव के द्वारा दूसरे मानव पर उसकी इच्छा के विरूद्ध , उसके धर्म तथा सिद्धांतों को पैरों तले कुचलने की बात कहता हो ? ऐसा कौन सा धर्म है जो लालच , ईर्ष्या , आतंक और अधर्म को बढ़ावा देता हो ?
जब एक बालक किसी परिवार में जन्म लेता है , तो वह उस परिवार द्वारा अपनाये गए धर्म से स्वतः ही जुड़ जाता है। एक बालक जब जन्म लेता है तो उसे कहाँ पता होता है कि  वह किस धर्म का है ? यदि उसने हिन्दू के घर जन्म लिया तो हम मान लेते है कि वो हिन्दू है और यदि मुस्लिम के घर जन्म लेता है तो हम उसका धर्म मुस्लिम तय कर देते है। और फिर उसी धर्म की आस्था और विश्वास  के आधार पर उस बालक के संस्कारों और समाज का विकास होता है।  यही नहीं उस बालक का समाज में एक अपना अस्तित्व बनता है।
एक धर्म से दूसरे धर्म में जाना , या दूसरे धर्म से तीसरे धर्म को अपनाना। आखिर ऐसे धर्म का क्या अस्तित्व है ? जो धर्म किसी लालच के वशीभूत होकर अपनाया जाये भला वो धर्म क्या किसी का भी कल्याण कर पायेगा ? जिसका कोई  अस्तित्व ही नहीं वह भला समाज के लिए उपयोगी कैसे साबित हो सकता है ? जो व्यक्ति एक बार किसी लालच के कारण अपना धर्म परिवर्तन कर सकता है , वो कल किसी और वजह से दोबारा भी तो अपना धर्म बदल सकता है।  फिर ऐसे प्रपंचों का  भला क्या फायदा होगा ? आमिर खान द्वारा अभिनीत  फिल्म “पी के ” में निर्देशक राजू हिरानी ने लोगों को यही सन्देश देने की कोशिश की है।  फिल्म  के एक संवाद में ये कहा है ” कि हमारे शरीर पर कहाँ ठप्पा लगा है , जो  ये बताये  की हम किस धर्म से है ” ? और शायद सत्य भी यही है।
धर्म किसी भी इंसान की स्वेच्छा पर निर्भर करता है।  धर्म मानव के अंदर की आस्था और विश्वास का प्रतीक है । वास्तव में ईश्वर ने तो शायद सिर्फ मानवता का धर्म ही बनाया है।  और इसी धर्म का आचरण करना का सन्देश हमारे सभी धर्म ग्रन्थ भी देते है।परन्तु राजनितिक सत्ता का लोभ , मनुष्य की आँखों पर लालच की ऐसी पट्टी बाँधता है कि फिर उसे कुछ भी नज़र नहीं आता है। महाभारत के काल में सत्ता ने “धर्मयुद्ध” कराया था , और आज के युग में सत्ता के कारण “धर्म” के लिए युद्ध हो रहा है।
#रिंकल शर्मा
परिचय-
नाम – रिंकल शर्मा
(लेखिका, निर्देशक, अभिनेत्री एवं समाज सेविका)
निवास – कौशाम्बी ग़ाज़ियाबाद(उत्तरप्रदेश)
शिक्षा – दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक , एम ए (हिंदी) एवं फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा 
अनुभव –  2003 से 2007 तक जनसंपर्क अधिकारी ( bpl & maruti)
2010 – 2013 तक स्वयं का स्कूल प्रबंधन(Kidzee )
2013 से रंगमंच की दुनिया से जुड़ी । बहुत से हिंदी नाटकों में अभिनय, लेखन एवं मंचन किया । प्रसार भारती में प्रेमचंद के नाटकों की प्रस्तुति , दूरदर्शन के नाट्योत्सव में प्रस्तुति , यूट्यूब चैनल के लिए बाल कथाओ, लघु कथाओंं एवं कविताओं का लेखन ।  साथ ही 2014 से स्वयंसेवा संस्थान के साथ समाज सेविका  के रूप में कार्यरत।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।