माँ की सोन चिरइया

Read Time3Seconds
garima sinh
बैठे- बैठे रोज़ मैं तकती आसमान में चिड़िया को ,
बार-बार पूछा करती अपनी सुंदर गुड़िया को ,
मन करता है उड़ जाऊ मैं एक पल को आकाश में ,
मुझको गुड़िया समझाती थी पंख कहाँ तेरे पास है,
मैं छोटी थी समझ न पाती गुड़िया से झटपट लड़ जाती ,फेंकती उसको हाँथ से ,
दिन भर मैं उदास सी रहती उस गुड़िया की बात से
मम्मी मेरे पास थी आती ,गोंदि में फिर मुझे उठती,
लाड़ लड़ाती प्यार जताती, बार-बार मुझको सहलाती!
क्यों रूठी हो गुड़िया रानी आज नही की कुछ शैतानी,
तुमको क्या है कोई परेशानी,
इतना सुनकर हुलस पड़ी मैं
गुस्से से फिर झुलस पड़ी मैं
क्यों नहीं पंख दिलाया तुमने
उड़ना नही सिखाया तुमने
चिड़िया मुझे चिढ़ाती है
गुड़िया मुझे सताती है
जाओ तुमसे बात नही करनी
तब मम्मी झट से मुस्काई
मुझको अपने पास बुलाई
गोंदि में फिर मुझे उठाया
सीने से फिर मुझे लगाया
कंधे पे सिर अपने टिका के बोली मुझको फिर सहलाक़े…….
तूँ चिडियों की रानी है
तेरी अलग कहानी है
एक दिन ऐसा आना है
तुझको भी उड़ जाना है
ये घर तेरी बगियाँ है
मैं तो बस एक माली हूँ
छोड़ हमें उड़ जाएगी
दूर देश तू जाएगी
लौट कभी ना आएगी
तू सुना कर देगी अंगना
मेरी चिड़िया खुश तू रहना
बात समझ अब आती है
मुझको बड़ा सताती है
ओ माँ मुझको अब नही उड़ना
अपने पास बुला लो ना
सीने से लगाकर मुझको गोंदी में सुला लो ना !!
#गरिमा सिंह
परिचय- 
नाम-  गरिमा अनिरुद्ध सिंह
साहित्यिक उपनाम-मधुरिमा
राज्य-गुजरात
शहर-सूरत
शिक्षा- एम ए प्राचीन इतिहास
कार्यक्षेत्र-शिक्षण
विधा – हास्य ,वीर रस ,शृंगार
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

धर्मान्तरण" या  "धर्म में अंतर"

Fri Sep 7 , 2018
सुबह के अख़बार से लेकर रात के समाचार तक, पूरे दिन में एक ना एक बार एक शब्द कानों में सुनाई पड़ ही जाता है – धर्मान्तरण।  देश के हर कोने से एकाध जगह  सुनाई दे ही जाता है कि फलां फलां जगह इतने लोगों ने अपना धरम परिवर्तन किया। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।