“भटक गया हूँ”

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keshav
मैं रास्ता भटक गया हूँ,
जीवन के इस सफर में,
दुखों ने भी डाला है डेरा,
खुशियों के इस डगर में।
मेरे अपने भी छूट गए हैं,
मेरे सपने भी टूट गए हैं,
गिर रहा हूँ हर कदम पर,
दर-दर की ठोकरें खाकर,
सम्भलने की कोशिशों में,
हर बार असफल रहा हूँ,
क्योंकि!
छाया है हर ओर अंधेरा,
उजाले भरे इस नगर में।
मैं रास्ता भटक गया हूँ,
जीवन के इस सफर में।।
मेरे जीवन के रास्ते में,
अब जो कोई मिल रहा है,
मैं हो लेता हूँ संग उसके,
इस उम्मीद में की!
अब मेरा ठिकाना मिलेगा,
पर अजनबी!बीच राह में,
मेरा साथ छोड़ जा रहा है,
मैं अब अकेला हो गया हूँ,
मानवों के इस शहर में।
मैं रास्ता भटक गया हूँ,
जीवन के इस सफर में।।
सभी अनजान हो गए हैं,
अब तो मेरे इस जीवन में,
और पता नहीं क्यों?
न ये स्याह रात बीतती है,
और न ही सवेरा होता है,
अपना ठिकाना ढूंढते ढूंढते,
सभी तरह से लाचार होकर,
मैं तो अब फंस गया हूँ,
मुसीबतों के इस भवंर में।
मैं रास्ता भटक गया हूँ,
जीवन के इस सफर में।।(इति)।।

#केशव कुमार मिश्रा

 परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।