नारीत्वता

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shalini khare
चंद्र की चाँदनी हूँ
तारों को समेटे
आँचल में
फैलाती शीतलता
दिवाकर की हूँ उषा किरण
जो नभ और धरा को
 देती नवीनता
मेरा हैं हर दिवस
फिर एक दिवस क्यों
    करू हर्ष
बन सलिला मैं
देती जीवन में
      तरलता
दौड़ रहा हैं ,मेरा
       ही अमृत
हर एक की रगों में
 मैं ही सृष्टि
नहीं अपने होने का अहं
  यही तो मेरी नारीत्वता।।
#शालिनी खरे
परिचय- 
नाम :-शालिनी खरे
पति :-श्री शैलेन्द्र खरे 
शिक्षा :-एम.ए (हिन्दी साहित्य )
लेखन विधाएँ :-कहानी/कविता/लेख/लघुकथा/बाल साहित्य/ व्यंग्य
प्रकाशन:-विभिन्न  पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
प्रकाशित कृति:-“चाँदी के मोती ” 
                          (काव्य संग्रह)
प्रसारण:-आकाशवाणी, भोपाल,दूरदर्शन भोपाल
सम्मान:-पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी शिलांग(मेघालय)द्वारा “डॉ.महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान”-2017
“साहित्य समीर दस्तक”,भोपाल द्वारा “साहित्य गौरव, सम्मान 2017  विश्व हिन्दी रचनाकार मंच द्वारा “नारी सागर सम्मान”,के.बी.हिन्दी साहित्य समिति बिसौली बदायूँ उ.प्र.द्वारा “कीर्ति चौधरी स्मृति सम्मान सम्मान”2018
विशेष:-बच्चों के प्रोत्साहन हेतु स्कूलों में कार्यशाला
स्कूलों में कार्यशाला में निणार्यक की भूमिका
पता:-  भोपाल (मध्यप्रदेश)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।