कुछ ख़्वाब बुन लेना

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rupesh jain

कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा

दिल की सुन लेना तेरा इक मक़ाम हो जायेगा

मुद्दत लगती है दिलकश फ़साना बन जाने को

हिम्मत रख वक़्त पे इश्क़ मेहरबान हो जायेगा

टूटना और फिर बिखर जाना आदत है शीशे की

हो मुस्तक़िल अंदाज़ ज़माना क़द्रदान हो जायेगा

लर्ज़िश-ए-ख़याल में ज़र्द किस काम का है बशर

जानें तो हुनर तेरा मुल्क़ निगहबान हो जायेगा

मंज़िल-ए-इश्क़ में बाकीं हैं इम्तिहान और अभी

ब-नामें मुहब्बत ‘राहत’ बेख़ौफ़ क़ुर्बान हो जायेग

                         #डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।