अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ

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sakshi

आज मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ,
चाय की चुस्की संग
दिल का गीत गुनगुनाना चाहती हूँ।

न रोक,न टोक,
बेफिक्री से मौज में जीना चाहती हूँ..
आज मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ।

ख़ुशी से विभोर होकर नाचूँ,
न किसी के देख लेने की हिचक हो..
जो चाहता है मन ये बावरा,
उसे हासिल करना चाहती हूँ..
आज मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ।

न रहे किसी काम की चिंता,
हर दिन को ख़ास बनाना चाहती हूँ..
बेड़ियाँ सारी जो लादी हैं समाज ने,
तोड़कर उन्हें उड़ जाना चाहती हूँ..
आज मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ।

जियूँ अब अपनी शर्तों पर,
बंदिशों के जाल को तोड़ देना चाहती हूँ..
समाज के दोगले नियमों से,
दूर जाना चाहती हूँ..
आज मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ।

बेफिक्री से घुमूँ रातों को,
जो मन चाहे वो कर सकूँ..
न खुद को बचाने की बेबसी हो,
न इस समाज के तानों का डर हो..
बस कर सकूँ अपने मन का,
यही बार-बार दोहराना चाहती हूँ,
आज मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ।

                                                  #साक्षी पेम्माराजू  ‘स्वप्नाकाक्षी’

परिचय : बैंगलोर में निवास कर रही साक्षी पेम्माराजू  ‘स्वप्नाकाक्षी’ का इंदौर से भी नाता है,क्योंकि मध्यप्रदेश के झाबुआ से इन्होंने अपनी पढ़ाई की है। बचपन से हिन्दी में कविताएँ लिखने का इनका शौक अब तो जुनून है,जो स्वप्नाकशी नाम से देखने में आता है। फिलहाल यह सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के रुप में कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।