*पर्यावर्णीय पद*

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babulal sharma
1.🏉
पालन पोषण पेड़ प्रिय,परम्परा पितभाँति।
पर्यावरण प्रतीत पर, पंछी पथिक  पदाति।।
2.🏉
पौरुषपथ पहचान पुरु,पूत पेड़ प्रतिपाल।
प्रतिघाती पर्यावरण, पातक  पड़े पताल ।।
3.🏉
पल पल प्रण पूरा पड़े,पर्यावरण प्रदाह।
पान पताशा पाहुना, पूजन पेड़  प्रवाह।।
4.🏉
पेड़ पर्वती पर्यटन, पथजलीय पतवार।
परमेश्वर पति पार्वती,पर्यावरण प्रसार।।
5.🏉
पेड़ परिक्रम पीपली,प्रिय परवरदीगार।
पूत पातकी पंथ पर,पर्यावरण प्रसार।।
6.🏉
प्रियतम पत्र पठाईए,पहले पढ़ परबद्ध।
पर्यावरण  प्रकाशिए, पाले पेड़  प्रसिद्ध।।
7.🏉
प्रेम पत्रिका प्रीति पढ़े, प्रिय प्रसन्नता पास।।
पर्यावरण प्रभास पर,पाएँ पहल  प्रकाश।।
8.🏉
पौधारोपण  प्रण पले,पाणिग्रहण प्रचार।
पर्यावरणन पालना,पायक पथ प्रतिहार।।
9.🏉
परसों पहले पहर पर,पता परस्पर पाय।
पर्यावरण प्रयास पर,परिवारिक पर्याय।।
10.🏉
परदेशी  प्रिय  पावना,पेड़ प्रकार पलास।
प्रण पालन पर्यावरण,पा प्रमोद परिहास।।
11.🏉
प्रीत पहल प्रीतम पगी,परदेशी परनार।
पर्यावरण  प्रसारता, पनिहारी  पनहार।।
12.🏉
पुत्री प्रिये परणातहीं ,पंछी पंख पसार।
पीहर पौधे प्रीत पर ,पर्यावरण  पखार।।
13.🏉
पर पीड़ा पर पालना,पाले पर परिवार।
पर्यावरण  पखारता, पावन  पारावार।।
14.🏉
पर्वतराजा  पिताश्री, प्राणी  पशु पतिनाथ।।
पर्यावरण परिजन प्रिय,पारवती पतिसाथ।।
15.🏉
प्रातकाल पय पीजिये,पियारे पहलवान।
पर्यावरण  परम्परा , प्रण  पूरण परवान।।
16.🏉
पावक पवन पृथ्वी पे,पृथा पाल परिधान।
पर्यावरण प्रभाविता, पानी प्रिय परिमान।।
17.🏉
पाथल पीथल पातशा,प्रण पाती परिताप।
पर्यावरण पत पाले,परिजन  प्रीत प्रताप ।।
18.🏉
पर्यावरणी पर्यटन,परिकल्पित परिणाम।
पार पयोधि परिभ्रमण,परामर्श परधाम।।
19.🏉
प्रभासपट्टन पर पड़ा,पाला पूँजी पार।
परधर्मी प्रतिघातिया ,पर्यावरण प्रहार।।
20.🏉
प्राण प्रतिष्ठा पद प्रथा, पाले पालनहार।
पर्यावरण पाले पर,पुरुषोत्तम परिवार।।
21.🏉
परनारी परधन पगे, पातक पूत प्रजाति।
प्रतिघाती पर्यावरण,प्राणपतन परजाति।।
22.🏉
परहित परसेवा पलक,परोपकार प्रयास।
परिचारक पर्यावरण,पद प्रतिष्ठ परिभाष।।
23.🏉
परतंत्रता परदेशी ,पूर्ण पतन  प्राणांत।
पर्यावरणन पातकी,पातकर्क परिशांत।।
24.🏉
पानी पत पतवार पल,पलक पयोधि पयोद।
पर्यावरण  पर्यंक पर, परलौकिक  परिमोद।।
25.🏉
पारगमन पारावरन,परिपालन परिवार।
पेड़ पौध पर्यावरण,प्रकटे परिजन पार।।
🌹🌹

नाम- बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।