कुण्डलिया छंद विधान

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babulal sharma
( प्राथमिक  जानकारी)

सुन्दर दोहा लीजिए, सुन्दर भाव बनाय।
तेरह ग्यारह मातरा, यथा योग्य  लगाय।
यथायोग्य लगाय,चरण अंतिम दोहे का।
रोला छन्द बनाय,चरण पहला रोले का।
पहला  दोहा शब्द, अंत रोले के  सुन्दर।
भरें भाव भरपूर,बने कुण्डलिया सुन्दर।
.                         …..बाबू लाल शर्मा

*प्रथम दो पंक्ति दोहा* (13,11 )
दोहे के प्रथम व तीसरे चरण में 13,13 मात्राएँ अंत में २१२ या१११या ११२

दोहे के दूसरे व चौथे चरण में   11,11मात्राएं व अन्त में तुकान्त में एक गुरु एक लघु।

चार चरण रोला के
24 मात्रा प्रत्येक में
11,13
यति 11 पर

दोहे का अंतिम चरण  रोला प्रथम बनाय।
शब्द दोहे का ले प्रथम, रोला अंत बनाय।।
– – – – – – – – –
अर्थात….

पहला दोहा,

फिर पहले दोहे के अंतिम चरण को लेते हुए रोला(अंत में गुरू गुरू)

फिर रोला।।

प्रथम व अंतिम शब्द समान हो।
अर्थात जहाँ से शुरू वहीं से समापन।

*रोला*:-11,13 मात्रा से लिखा गया छंद:-
11 मात्रिक प्रथम व तृतीय चरण (विषम चरण) का अंत दीर्घ, लघु (२ १) से हो

13 मात्रिक द्वितीय व चतुर्थ चरण (सम चरण) का अंत  २ २ या १ १ २ या २ १ १ से हो।
………………………..बाबूलालशर्मा
*उदाहरण*- – –
.            *करवा चौथ*
.           कुण्डलिया छंद
.           🌙🌙🌙🌙
चौथ  व्रती  बन  पूजती, चंदा  चौथ  चकोर।
आज सुहागिन सब करें,यह उपवास कठोर।
यह   उपवास  कठोर , पूजती   चंदा  प्यारा।
पिया  जिए  सौ साल, अमर संयोग  हमारा।
कहे लाल कविराय, वारती  जती  सती बन।
अमर रहे  तू चाँद, पूजती   चौथ  व्रती  बन।
.            🌙🌙🌙🌙
नारि सुहागिन कर रही,पूजा जप तप ध्यान।
पति की लम्बी आयु हो, खूब बढ़े जग मान।
खूब  बढ़े  जग मान, करे  उपवास  तुम्हारा।
मात  चौथ  सुन  अर्ज , रहे  संजोग  हमारा।
कर सोलह सिंगार, निभाये प्रीत  यहाँ  दिन।
पति हित सारे काज, करे ये  नारि सुहागिन।

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।