गाफ़िल

Read Time0Seconds

rupesh jain

ग़म में ग़ाफ़िल दीवाना इतना, कि

ग़म की अंधेरी रात में

ग़म ही चिराग़ हो गया।

जलती रही उसकी चिता रात भर

बिना किसी के आग दिए ही

अपने ग़म कि गर्मी से राख हो गया।

सहर की हवाओं ने उड़ा दी

उसकी चिता की राख

फ़िज़ा में दूर कही वो खो गया।

सर्द हवाओं ने हमें बताया

बदनसीब दीवानों का

क़िस्सा और एक ख़ाक हो गया।

# डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

दीवार 

Mon Jul 2 , 2018
यह तो सत्य है ही कि दीवारें करती है विभक्त हिस्सों में । ये हिस्से बाँट देते हैं – देश को भी और घर परिवारों को भी । जितना सत्य है यह , उतना ही सत्य यह भी है कि दीवारें देती हैं सुरक्षा भी । इन दीवारों से ही […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।