दीवार 

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devendr soni
यह तो सत्य है ही
कि दीवारें करती है विभक्त
हिस्सों में ।

ये हिस्से बाँट देते हैं –
देश को भी और घर परिवारों को भी ।

जितना सत्य है यह ,
उतना ही सत्य यह भी है
कि दीवारें देती हैं सुरक्षा भी ।

इन दीवारों से ही रहतीं हैं सुरक्षित
मुल्क की सरहदें , और
घर – परिवार के सदस्य भी।

सोचें जरा –
क्या विभक्त ही करती हैं
हमेशा दीवारें !

अक्सर घर में उठती दीवारें
एहसास जरूर कराती हैं –
विघटन का , मगर –
घर के अंदर भी बना देती है
एक और घर
जो रखते हुए अलग – अलग भी
करती है प्रयास , सामीप्य और
आपसी जुड़ाव का ।

बच जाते हैं इस दीवार से भी
अक्सर घर अनेक
जो अलग अलग रहकर भी वहीं
बने रहते हैं सुरक्षित और
सुख – दुःख के साथी भी ।

इसीलिए कहता हूँ –
जरूरी हैं दीवारें भी
माहौल और परिस्थिति के अनुसार।
#देवेन्द्र सोनी , इटारसी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।