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चेहरों की चौखटों पर
चिपके हुए रिश्तों के इतिहास
बड़ेबेमानी लगते हैं
लेकिन जब अविश्वास के हाथों
विश्वास सूली पर चढ़ा दिया जाता है
तो एहसासों के आइने
चकनाचूर हो जाते हैं
चाहतों की वो चौड़ी सड़कें
पगडंडियों में तब्दील हो जाती हैं
विश्वास की चट्टानें पिघलकर
आंसुओ का सैलाब बन जाती हैं
करता यही नियति के हाथों का खेल है
या कोई परिहास?
#अनिता श्रीवास्तव ‘तमन्ना’जबलपुर(मध्यप्रदेश)
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