इंसान उसे कहते हैं…

Read Time7Seconds

manoj

काम किसी के आए इंसान उसे कहते हैं,
दर्द पराया उठा सके इंसान उसे कहते हैं,
दुनिया एक पहेली कहीं धोखा कहीं ठोकर,
गिर के जो संभल जाए इंसान उसे कहते हैं।

संसार मुसाफिर खाना है सांसों का आना-जाना है,
सागर गहरा नाव पुरानी मौजों का आना जाना है,
व्यर्थ की चिंता क्यों करता है ऐ माटी के पुतले तू
जीवन बड़ा अनमोल है कष्टों का आना जाना है।

जख्म का दर्द जब हद से गुज़र जाता है,
तब हरेक पल पहाड़-सा नज़र आता है,
मन को कितना भी समझाओ ठीक होगा,
पर हर नया ज़ख्म उभर के कहर ढाता है।

पत्ते आँधियों का रूख भांप लेते हैं,
भांप के आँधियों का वेग माप लेते हैं,
कौन-सा शजर किस दिशा में गिरेगा,
उसकी आहट को चुपचाप नाप लेते हैं।

                 #मनोज कामदेव

परिचय : अनेक पुस्तकें लिखने के साथ ही सम्पादित भी कर चुके मनोज ‘कामदेव’ लेखन क्षेत्र में नया नाम नहीं है। 1973 में खैराकोट(उत्तराखंड) में आपका जन्म हुआ है,और भगतसिंह कालेज(दिल्ली विश्वविद्यालय)से बीए किया है। डी.आर.डी.ओ. में वरिष्ठ प्रशासनिक सहायक के पद पर कार्यरत होकर चन्दर नगर (गाजियाबाद) में निवासरत हैं।आपके प्रकाशित कविता संग्रह ‘मेरी कविताएं'(दिल्ली),’मेरा अंदाज़े बयां'( मेरठ) और ‘मेरी ईज़ा’आदि (मेरठ) द्वारा संपादित हैं। प्रकाशित पुस्तक संग्रह में ‘उत्तराखंड के गौरव’ (मेरठ) भी सम्पादित है। संपादित। इसके अलावा प्रकाशनाधीन दोहे संग्रह ‘त्रिशा’,प्रकाशनाधीन पुस्तक संग्रह ‘देवभूमि उत्तराखंड.’ एवं प्रकाशनाधीन गज़ल संग्रह ‘हुस्ना’ भी है। स्मारिका (कुमाऊँ जनसहयोग समिति) दिल्ली,स्मारिका (ठोसावस्था भौतिक प्रयोगशाला),दिल्ली और मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पत्रिका ‘यदुवंश गंगा’ आदि से भी जुड़े हैं। दिल्ली में आपकी रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं और सम्मान भी मिले हैं। सन 2000 में हिन्दी निबन्ध लेखन में प्रशस्ति- पत्र,मिनिस्ट्री आफ डिफेन्स द्वारा सर्टिफिकेट सहित ‘आगमन गौरव सम्मान’(2013),’काव्यदीप सम्मान’,
‘साहित्य प्रेरक सम्मान(2014)’, ‘हिन्दी दिवस सम्मान(2014)’ और
‘बज़्म-ए-जीनत सम्मान’(2015) के रुप में करीब 22 सम्मान मिले हैं। 25 वर्ष से देश के विभिन्न कवि-सम्मेलनों में भागीदारी है तो 10 पुस्तकों की समीक्षा एवं कई की भूमिका पर भी कलम चलाई है।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

प्रीत का हरश्रृंगार...

Thu Mar 2 , 2017
इस भीषण तपती गरमी में एक अद्भुत शीतल कल्पना हो चली,खुली आँखों ने एक प्यारा स्वप्न दिखाया,और मैं शरद ऋतु की प्रभात बेला में तुम्हारे संग सैर पर निकल चली। हाथों में डाले हाथ लहराते हुए सुबह की हल्की गुलाबी ठंड…।एक ‘हरश्रृगांर के पेड़’ पर बरबस दृष्टि चली गई…। हरी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।