अच्छी तरह याद है इतवार था उस दिन… कबाड़ी वाले की आवाज गली में गूंज रही थी घर के कबाड़ के साथ बिक गई थीं कुछ अमूल्य निधि भी बस १२ के भाव में… कब सोचा था कि एक रद्दी बेचने वाला ले जाएगा मेरे जीवन के सारे एहसास कुछ […]
एक समय था जब साहित्यकारों का सम्मान अतुलनीय था। उनकी रचनाएं व किताबें छापने के लिए प्रकाशकों की भीड़ लगी रहती थी। बदले में उन्हें मानदेय और लाभांश भी मिलता था, जिससे उनका जीवनयापन आसानी से चल जाता था। वह अधिक से- अधिक लेखन में ही ध्यान देते थे । […]
(कश्मीर में भारतीय सेना पर पत्थरबाजी पर) खुली छूट अब चाहिए,सेना के वीर जांबाजों को, अच्छा सबक सिखाना है,दुस्साहसी पत्थरबाजों को| इनके घर में छुप के बैठे,आतंकी जो इनके आका, पैलेट गन से छलनी कर दो,देश पे डाले जो डाका| हिंदुस्तान में रह खाकर भी,ये पाक परस्ती करते आए, हुर्रियत […]
गरीबी और साथ में दर्द,फिर भी लोग बनते हैं हमदर्द..जी हाँ,भारत के जीवन में आज हमें जब आजादी मिले हुए सत्तर वर्ष हो गए हैं तो भी,आज गरीब लोग अंग्रेजों वाले समय जैसा जीने को मजबूर हैं। मैं बहुत-से पिछड़े इलाको की बात कर रहा हूँ, जहां लोग एक रोटी […]
कुहुक कुहुक में गीत प्यार, के गाती कोयल डाली पर। हर्षित होता मन उपवन, इठलाती कोयल डाली पर।। मदन तीर से बिंधी हुई, राग छेड़ती प्रीत मल्हार। मादक-मादक गंध महकती, पत्ता-पत्ता डाली पर।। अमराई में मोर की गंध, महक रही है डाली पर। कोयलिया फिर मचल उठी, कुहुक रही है […]
बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया। रेस्टॉरेंट में बैठे खाना खा रहे दूसरे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से देख रहे थे,लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था। खाने […]
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए।
आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं।
कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।