कोरोना ने पूरी तेजी के साथ पुन: दस्तक दे दी है। चारों ओर त्राहि-त्राहि मची हुई है। पीडितों का हाल बुरा है। सरकारें अपने ढंग से देश को चलाना चाहतीं हैं और डब्ल्यूएचओ अपने ढंग से। सरकारें सत्ता की ललक में निर्णय ले रहीं हैं और डब्ल्यूएचओ किसी के खास […]

जीवन की आपाधापी में लोगों ने समस्याओं का अम्बार लगा लिया है। शारीरिक सुख और थोथे सम्मान की चाहत में भौतिक वस्तुओं की भीड में निवास स्थान एक अजायबघर बनकर रह गया है। यही अजायबघर विभिन्न समस्याओं का कारक बनता जा रहा है। कभी एसी खराब तो कभी कार खराब। […]

लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ विकेन्द्रीकृत व्यवस्था की स्थापना से जुडा है। सत्ता से लेकर विकास के मापदण्डों तक यही सिध्दान्त लागू होना चाहिए ताकि समाज के आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति तक सुविधायें और संसाधनों की सीधी पहुंच हो सकेगी। लगभग 138 करोड नागरिकों वाले देश में संवैधानिक व्यवस्थायें निरंतर […]

समाज को खेमों में बांटकर निजी स्वार्थों की पूर्ति में लगे लोगों की दुनिया में कमी नहीं है। कभी जीवन शैली के नाम पर तो कभी मान्यताओं का बहाना लेकर, कभी लालच को हथियार बनाकर तो कभी धार्मिक उन्माद फैलाकर अहम् की पूर्ति के उदाहरणों से इतिहास भरा पडा है। […]

जीवी हैं बुद्धि नहीं, कहलाते बुद्धिजीवी हैं। सेवा वो किये नहीं, कहलाते समाजसेवी हैं।। कार्य करते नहीं वो,कार्यकर्ता कहलाते हैं। निधि अपना भरते,प्रतिनिधि  कहलाते हैं।। गणमान्य हैं सबके,मान्य वो गण रखते हैं। अपने साथ सूई नहीं, कैंची जरुर रखते हैं।। अनपढ़ नेता बनते,पढ़कर नौकरी करते हैं। आईएएस उनके ही,ले फाइल […]

जो सत्ता में बैठा है, उसका गरूर लाजमी है, खुदा नहीं है वो मगर, थोड़ा सरूर लाजमी है। नादां है वो, जो खुद को बादशाह समझता है, चुनें न जो हम उसे, उसकी फकीरी लाजमी है। हम बहुत कमजोर हैं, ये तो मालूम है हमें, कह दो उससे,उसका डरना जरूर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।