अक्षरों की आराधना से शब्दों का सामर्थ्य बनता है, और वही शब्द मिलकर अभिव्यक्त करते हैं मन के प्रकाश को, मनोभावों को, संवेदना और सत्य को, शाश्वत और अटल को, जागरण और अभिव्यक्ति को, जन की पीड़ा को, मानस के संवेग को, प्रेम को, विरह को, शृंगार को, आह्लाद को, […]

जब कभी जाता हूँ श्मसान, दिखते हैं दिन में कुछ अपने। कुछ बहुत ख़ास से लोग, कुछ प्यारे नाते-रिश्तेदार, कुछ मेरे पुराने दोस्त-यार, पर नज़र आता नहीं वर्तमान। चिता से उठती हुई लौ-लपटें, चिता में डलता हुआ घी-कपूर, और चंदन की लकड़ी के टुकड़े, सब बताते हैं अनेकता में एकता। […]

अब न वो दर्द, न वो दिल, न वो दीवाने हैंअब न वो साज, न वो सोज, न वो गाने हैंसाकी! अब भी यहां तू किसके लिए बैठा हैअब न वो जाम, न वो मय, न वो पैमाने हैं-नीरजक्या कहूँ! निःशब्द हूं।लगभग विचारशून्य-सी।क्या लिखूं।एक नन्ही कलम कैसे लिख पाएगी उस […]

पहला पल, पहली घड़ी माँ का आँचल थामा था अजीब सी अनुभूति थी माँ ने भी यह माना था भुला दी तकलीफें सारी अभी-अभी माँ ने झेली थी सकूँन का वह पल था झोली में खुशियाँ खेली थी छलक पड़े आँसू भी नयन जो कल सूखे थे फुट पड़ी दूध […]

वह नई नवेली दुल्हन थी सोलह श्रृंगार सजाया था लांघ पिता की दहलीज आगे कदम बढ़ाया था थी अरमानो की डोली सपने खूब संजोये थे पिता ने पीठ दिखाई तो भाई भी बहुत रोये थे कुछ वर्षों में ही तूमने इतना प्यार लुटाया था बनकर दिल की धड़कन कितना हमें […]

बहू मैं तुम्हारे घर की बेटी बनाकर रखना दुल्हन हूँ,तूम्हारे बेटे की पलकों पर बैठाकर रखना निकली हूँ पिता के दर से डोली अरमानों की सजाकर खुशियाँ सदा परोसना गोदी मे अपनी बैठाकर आई हूँ माता-पिता की चौखट को लांघकर दिल मे बैठाकर रखना बेटी अपनी समझकर खुश्बू हूँ, मैं […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।