2

निकलूं मैं  जब  तेरी  गलियों  से राहों में प्रियतम तुम मिल जाओ। लौटा  दो तुम अब मेरी नींद मुझे वापस मेरा मुझको दे दिल जाओ।। भटक रही शाम बिन तेरे भटके – भटके से दिन हैंं। क्या जानो तुम हाल मेरा हम जीते कैसे तुम बिन हैं।। पस्त अवारा अब […]

इश्क में तेरे ग़ुम हूं मैं,     ख़ामोश और गुमसुम हूं मैं ।   नाम से तेरे इश्क मुकम्मल,       बिन तेरे गुमनाम हूं मैं ।।     तुमसे मोहब्बत की थी मैंने,         तुमको ही बस चाहा था ।      दुनिया की […]

हिन्दी विरोध वस्तुत: भाषा और साहित्य के कारण से नहीं, परन्तु आर्थिक-सामाजिक-राजनैतिक कारणों से होता है। पूर्वांचल में, असम में और बंगाल मारवाड़ी व्यापारियों का विरोध हिन्दी-विरोध का रूप लेता है। उड़ीसा में संबलपुरी (हिन्दी-मिश्रित उपभाषा) अपना स्वतंत्र अस्तित्व चाहती है। दक्षिण में उत्तर भारत, संस्कृत, आर्य, ब्राह्मण और हिन्दी का विरोध एक साथ किया जा सकता […]

बड़ा नाजुक है दिल उससे भी नाजुक इसे समझाना है इश्क में रुसवाई मिले या दर्द ए किस्सा पुराना है कत्ल कर के नज़रों से अदा जिसका चैन चुराना है बड़ी कातिल जिसकी आदायेँ दिल कमबख्त उसी का दिवाना है आँखें जिसके मैखाने से भी गहरी बड़ा मुश्किल उसके पाड़ […]

मन में कुछ ठाने, झोला,झंडी ताने, कपड़े वही पुराने, चला जा रहा कमाने!! परिवार की तमाम ख्वाहिशो को, जिम्मेदारियों से खुद को बांधे, चला जा रहा कमाने! कपड़े नही ढंग के तन में, परेशानी हैं घर की सामने, जाने को मन बिल्कुल ना माने, फिर भी, चला जा रहा कमाने!! […]

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की यह पहली बड़ी सभा थी। लंबे समय से रामलीला मैदान में इतनी भीड़ जमा नहीं हुई थी। भीड़ जमा करने में कांग्रेस पार्टी की महारत को कौन नहीं जानता ? लेकिन राहुल-जैसे अपरिपक्व नेता के नाम पर दिल्ली की गर्मी में इतनी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।