तन्हा तन्हा रहती हूँ मैं
अपनी मौज में बहती हूँ मैं
तुम क्या जानो खंड़हर जैसी
जर्रा जर्रा ढ़हती हूँ मैं
निर्मल जल हिमगिरि से लेकर
कलकल कलकल बहती हूँ मैं
बिन बोली कितनी हैं बातें
फिर भी चुप चुप कहती हूँ मैं
मैं ठहरी गंगा सी सरिता
बोझ पाप का सहती हूँ मैं
#सरिता सिंघई ‘कोहिनूर’
परिचय : श्रीमति सरिता सिंघई का उपनाम ‘कोहिनूर’ है। आपका उद्देश्य माँ शारदा की सेवा के ज़रिए राष्ट्र जन में चेतना का प्रसार करना है।उपलब्धि यही है कि,राष्ट्रीय मंच से काव्यपाठ किया है। शिक्षा एम.ए.(राजनीति शास्त्र) है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के वारासिवनी बालाघाट में निवास है। जन्म स्थान नरसिंहपुर है। गीत,गज़ल,गीतिका,मुक्तक,दोहा,रोला,सोरठा,रुबाई,सवैया,चौपाईयाँ,कुंडलियाँ ,समस्त छंद,हाइकू,महिया सहित कहानी ,लेख,संस्मरण आदि लगभग समस्त साहित्य विद्या में आप लिखती हैं और कई प्रकाशित भी हैं। आपकी रूचि गायन के साथ ही लेखन,राजनीति, समाजसेवा, वाहन चालन,दुनिया को हंसाना,जी भर के खुद जीना,भारत में चल रही कुव्यवस्थाओं के प्रति चिंतन कर सार्थक दिशा देने में है। पूर्व पार्षद होने के नाते अब भी भाजापा में नगर मंत्री पद पर सक्रिय हैं। अन्य सामाजिक और साहित्यिक संगठनों से भी जुड़ी हुई हैं।
Sat May 12 , 2018
हिंसा से हिंसा ही बढ़ती सारे जग की शांति हरती बैरभाव,कटुता बढ़ती एक दूसरे से दूरी बढ़ती भाईचारा खत्म हो जाता हर कोई दुश्मन नजर आता ऐसी घड़ी मे धैर्य अपनाओ राग,द्वेष,हिंसा मिटाओ प्रेम,सदभाव की अलख जगाओ राह भटको को राह पर लाओ परमात्मा के है सब बन्दे उन्हें परमात्म […]