“मेरे आशना”

gagan padampuri
इस दिल ने कितनो को मारा था
किसी एक पे ये भी मरा था,
जो हाल मैंने मेरे पर
कुछ मरने वालो का किया,
उसने भी मेरा वही हाल बना रखा…
किस बात से मै दीवाना था
किस बात पर! वो मोहब्बत थी
किस लिए ये एहसान सा है
जो तुम हुए ही नही ‘मेरे आशना’…
बावफा तो इश्क़ सबमें होता
मै दुनिया सा नही हूँ,
शायद मै इश्क़ से पेश्तर सोचा नही,
गिला तो उन्हें हुआ होगा ना
जो दिल लगाया उनसे बिना पूछे,
और इज़हार भी ऐसे किया की
आप मुझसे प्यार करते हैं! हैं…
अब बेहाल हूँ तो इलज़ाम क्यूँ उसपर,
जरा ऐसा रहना भी सिख लूँ,
‘ये अब कभी कभार नही होता
ग़म का कभी दीदार नही होता’….
जो लाख गुणा अच्छा है तनहापन
मेरे हर पल से वो जुदा नही होता
फिर भी यार कहता है
मेरा जिक्र तुमसे जुड़ा नही होता
मैं तो काफ़िर सा ही रह गया
कहीं हद से बढ़कर वो खुदा
याँ कहो हर सांस
इबादत बनके रह गया…!!
    #मेहताब पदमपुरी

परिचय :

नाम- गगनदीप सिंह
साहित्यिक उपनाम- मेहताब पदमपुरी
राज्य- राजस्थान
शहर- पदमपुर
शिक्षा- एम.ए. प्रीवियस अध्ययनरत
कार्यक्षेत्र- मुनीम
विधा – ग़ज़ल, कविता व नज़्म आदि 
प्रकाशन- महकते लफ्ज़ (साँझा संग्रह)
सम्मान- युग सुरभि 
लेखन का उद्देश्य- दर्द को आसान और कम करना

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।