उलझी जिंदगी

ramalaxmi
सवालों के जंगल में खो गई है ज़िन्दगी।
उम्मीद के सैलाब में बह गई है ज़िन्दगी॥
बेबस  है हर कोई,मंज़िल न मालूम।
मुसाफिर बन के,रह गई है ज़िन्दगी॥
हर सुबह लेती है,जन्म एक नई ख्वाहिश।
न जाने कैसे-कैसे खवाब,सजाती है ज़िन्दगी॥
कभी खुशनुमा कभी,गमगीन आई  मंज़िलें।
सुकून के इंतज़ार में,कट रही है ज़िन्दगी॥
सुख-चैन के सेहरा में,खो गया वजूद  कहीं।
खुद अपनी ही तलाश में,कट रही है ज़िन्दगी॥
दोस्त तो ईश्वर है,और दोस्त के लिए वक़्त नहीं।
रिश्तों के ताने-बाने में,उलझ कर रह गई है ज़िन्दगी॥
#एम.डी.यस.रामालक्ष्मी
परिचय:एम.डी.यस.रामालक्ष्मी की जन्मतिथि-२३-९-१९७९ तथा जन्म स्थान-विशाखापटनम(आँध्रप्रदेश)है। शिक्षा-एम.ए. और एम.फिल.(दोनों हिन्दी),डिप्लोमा इन ट्रांसलेशन और डिप्लोमा इन कम्प्यूटर्स है। आपका वर्तमान निवास क़तार में और स्थाई निवास-रेडक्रॉस स्ट्रीट गाँधी नगर (काकीनाडा,आंध्राप्रदेश)में है। आपकी लेखन विधा-कविता,मुक्तक है। सोशल मीडिया के विभिन समूह सहित समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं में भी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। आपको सम्मान के रुप में ‘मुक्तक भूषण’ मिला है। लेखन का उदेश्य-आत्म संतृप्ति है।

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Tue Jan 16 , 2018
  नई दिल्ली। विश्व पुस्तक मेले में साहित्यकार शिवकुमार बिलगरामी के ग़ज़ल संग्रह ‘वो दो पल’ का विमोचन किया गया। संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष डॉ.सत्यनारायण जटिया, उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति पानाचन्द जैन,दिल्ली के मौजूदा न्यायमूर्ति तलवंत सिंह,वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव एवं संपादक राकेश पाण्डे द्वारा प्रगति मैदान के […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।