नया साल आ गया

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ajay ahsas
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया,
कहते हो मुबारक हो नया साल आ गया।
हम हो रहे हैं बूढ़े,कदम बढ़ रहे आगे,
दीवार से निकली हुई ईंटों से यूं झांके
दीवार से जो ईंट निकले,ईंट कम होगी,
परिवार से निकला तो सबकी आंख नम होगी…
ये शब्द नया सुन के,आंख में लाल आ गया।
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया॥
होंगे वही महीने और आएंगे वही दिन,
दिनभर करेंंगे मेहनत,फिर भी चैन लेंगे छीन।
ढूंढोगे पूरे साल चैन-सुख वो कहां है,
बस मारपीट दंगे कत्लेआम यहां है
ये दुष्ट,सज्जनों की पहने खाल आ गया।
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया॥
धोखे हुए पुराने,नए साल में होंगे,
जिनसे किया हो प्रेम,अब वो आंसू ही देंगे।
कितना किया भरोसा कि इस साल कुछ होगा,
ये साल भी गुजरा और हमें दे गया धोखा…
करने हमारी भावना के फाल आ गया।
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया॥
धरती चली तो दिन बने और साल बन गए,
दुनिया में फंसाने के हमें जाल बन गए।
हमसे है छीना सब,हम फटेहाल बन गए,
चक्कर में उनके पड़कर हम कंगाल बन गए
अब सीख के तुमसे चलना हमें चाल आ गया।
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया॥
कहते हो उम्र आपकी बढ़़ती है चल रही,
लेकिन हरेक पल में यह घटती है चल रही।
लगभग समय जीवन का मैंने जो भी बिताया,
एहसास की कलम से मैंने आज लिखाया
चलना है मुझे अब तो मेरा काल आ गया,
कहते हो यार तुम कि,नया साल आ गया॥

                                                       #अजय एहसास

परिचय : देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सुलेमपुर परसावां (जिला आम्बेडकर नगर) में अजय एहसास रहते हैं। आपका कार्यस्थल आम्बेडकर नगर ही है। निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ हिन्दी भाषा के विकास एवं हिन्दी साहित्य के प्रति आप समर्पित हैं।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।