नया साल आ गया

Read Time0Seconds
ajay ahsas
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया,
कहते हो मुबारक हो नया साल आ गया।
हम हो रहे हैं बूढ़े,कदम बढ़ रहे आगे,
दीवार से निकली हुई ईंटों से यूं झांके
दीवार से जो ईंट निकले,ईंट कम होगी,
परिवार से निकला तो सबकी आंख नम होगी…
ये शब्द नया सुन के,आंख में लाल आ गया।
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया॥
होंगे वही महीने और आएंगे वही दिन,
दिनभर करेंंगे मेहनत,फिर भी चैन लेंगे छीन।
ढूंढोगे पूरे साल चैन-सुख वो कहां है,
बस मारपीट दंगे कत्लेआम यहां है
ये दुष्ट,सज्जनों की पहने खाल आ गया।
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया॥
धोखे हुए पुराने,नए साल में होंगे,
जिनसे किया हो प्रेम,अब वो आंसू ही देंगे।
कितना किया भरोसा कि इस साल कुछ होगा,
ये साल भी गुजरा और हमें दे गया धोखा…
करने हमारी भावना के फाल आ गया।
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया॥
धरती चली तो दिन बने और साल बन गए,
दुनिया में फंसाने के हमें जाल बन गए।
हमसे है छीना सब,हम फटेहाल बन गए,
चक्कर में उनके पड़कर हम कंगाल बन गए
अब सीख के तुमसे चलना हमें चाल आ गया।
कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया॥
कहते हो उम्र आपकी बढ़़ती है चल रही,
लेकिन हरेक पल में यह घटती है चल रही।
लगभग समय जीवन का मैंने जो भी बिताया,
एहसास की कलम से मैंने आज लिखाया
चलना है मुझे अब तो मेरा काल आ गया,
कहते हो यार तुम कि,नया साल आ गया॥

                                                       #अजय एहसास

परिचय : देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सुलेमपुर परसावां (जिला आम्बेडकर नगर) में अजय एहसास रहते हैं। आपका कार्यस्थल आम्बेडकर नगर ही है। निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ हिन्दी भाषा के विकास एवं हिन्दी साहित्य के प्रति आप समर्पित हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

नया साल,नया बदलाव

Mon Jan 1 , 2018
तारीख,महीना,साल बदल जाते हैं, परन्तु नहीं बदलती हमारी दिनचर्या। कैलेण्डर बदलने की बधाईयां, एक औपचारिकता का एहसास… इसके सिवाए कुछ भी तो नहीं, मनाना ही है अगर नया साल… दिनचर्या में लाएं नया बदलाव, किसी का दिल न दुखाने का बदलाव… गैर को अपना बनाने का बदलाव, देश के लिए […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।