फेसबुक पर टपकते दोस्त

sunil jain

जब भगवान देता है छप्पर फाड़कर देता है,शायद यह कहावत अब दोस्तों के लिए हो गई है। `फेसबुक` वह छप्पर है,जिसे फाड़कर दोस्त टपकते हैं। ७० और ८० के दशक में अंकल-आंटी टपकते थे,वे आज भी टपक रहे हैं। दादा की उम्र का हो,या बिटिया की उम्र की लड़की,अंकल-आंटी के सम्बोधन से काम चल जाता है। कुछ बिगड़ जाते हैं तो कुछ कह जाते हैं,`तुझे शर्म नहीं आती मुझे आंटी कहते,आंटी होगी तेरी अम्मा` या फिर `बुडढा होगा तेरा बाप।` अंकल-आंटी के बाद अब दोस्त का टपकना शुरू हो गया है।
फेसबुक आने के बाद दोस्तों की बाढ़ आ गई है। यह ऐसा सैलाब है,जिसमें सभी रिश्ते बहकर दोस्त में तब्दील हो गए हैं। अनचाहे बालों की तरह यह हर जगह उग आए हैं, दोस्त। जहां तक नजर जाती है,दोस्त ही दोस्त नजर आते हैं,लेकिन जिगरी दोस्त नजर नहीं आता। दिखाई देते दोस्त-कीचड़ में सने,सूट-बूट में,कुर्ता-पाजामा में,धोती में,सलवार में,कुर्ते में, गुण्डे दोस्त,गुण्डी दोस्त..दोस्त और तो और छुपे रुस्तम की तरह दोस्त के दोस्त भी बन जाते हैं। आप उन्हें नहीं जानते,पर उनकी चोर नजरें आपकी हर क्रिया (पोस्ट) का पोस्टमार्टम करती है। आपकी अभिव्यक्ति आपकी शर्मिंदगी का कारण बन गई है। आप अपनी बात दोस्तों के लिए पोस्ट करते हैं,मालूम पड़ता है कि आपके दोस्त के दोस्त जो आपके दुश्मन हैं,वो आपकी पोस्ट के चीथड़े-चीथड़े कर देते हैं।
फेसबुक पर पसंद(लाइक) मिलने पर ऐसा लगता है,जैसे कुबेर का खजाना मिल गया,जितनी बेटे के जन्म की खुशी होती है,उतनी खुशी पोस्ट को करने के बाद मिल जाती है। प्रतिक्रिया या टिप्पणी (कमेंट) करने के बाद लगता है,बल्ले-बल्ले हो गई। फेसबुक दोस्तों के लिए है। आप उन्हें जानते हैं या नहीं। दोस्त कुकुरमुत्ते हो गए हैं। ये दोस्त किसी काम के नहीं। घर में मौत हो जाए,आप पोस्ट करेंगे-मेरा बाप मर गया। उसकी अंत्येष्टि बारह बजे है,बारह बजे तक जमींदार के जूतों की तरह ५० पसंद और २०० भागीदार(शेयर) आ जाएंगे और तो और १५० टिप्पणी आ जाएगी। बाप आपका मरा,पसंद वो कर रहे हैं,यानी बाप के मरने की खुशी है।
काश २५-३० बाप होते तो पसंद करने वालों की संख्या ४०० हो जाती,एक रिकार्ड बन जाता..`मेरे बाप मरे थे,तो ४०० पसंद आई थी,तेरा बाप मरा तो २५ पसंद..। मेरे बाप का मरना,तेरे बाप के मरने से ज्यादा पसंद किया गया।
मां भी दोस्त है,बाप भी दोस्त है,बहन भी दोस्त,बेटा भी दोस्त,दुश्मन भी दोस्त है,चिरकुट भी दोस्त,धनपत भी दोस्त, लेकिन सही मायने में कोई दोस्त नहीं है। दोस्त कोई नहीं बचा,सभी `फ्रैंड` हो गए है,जो केवल पसंद करते,साझा करते है,टिप्पणी करते हैंl ऐसा कोई नहीं,जो मजबूरी में सहारा दे सके,बाप की अर्थी को कांधा,किसान को कर्ज,सेना के जवान के बच्चों को आसरा। लानत है ऐसे `फ्रैंड्स` पर।

                                                            #सुनील जैन राही
परिचय : सुनील जैन `राही` का जन्म स्थान पाढ़म (जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद ) है| आप हिन्दी,मराठी,गुजराती (कार्यसाधक ज्ञान) भाषा जानते हैंl आपने बी.कामॅ. की शिक्षा मध्यप्रदेश के खरगोन से तथा एम.ए.(हिन्दी)मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया हैl  पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन देखें तो,व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी आपके नाम हैl कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में आपकी लेखनी का प्रकाशन होने के साथ ही आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हुआ हैl आपने बाबा साहेब आंबेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया हैl मराठी के दो धारावाहिकों सहित 12 आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैंl रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 45 से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैंl कई अखबार में नियमित व्यंग्य लेखन जारी हैl 

matruadmin

Next Post

नमन

Mon Sep 18 , 2017
गज वदन नमन कर सहचर चल गमन कर, करतल दल रखकर चरण गह नमन कर। भगत अब सब जन मत भटक इधर उधर, भजन कर नमन कर सफल जग जनम कर। समझ-समझ धर पग गलत मत कदम रख, अटक-अटक मत चल मन  समझकर चल। अब सर नत कर चल एक […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।