आसरा

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vinod sagar
दूसरों  का   जो  आसरा   होगा,
तो नहीं ख़ुद का भी भला होगा।
दूसरों   को   जो   तू    गिराएगा,
कल को तू भी  यहाँ गिरा होगा।
हौंसला  तब  ही  साथ  देता  है,
जब कड़ा  कोई  फ़ैसला होगा।
जब करोगे सनम  शुरू चलना,
तब  सुलभ  तेरा  रास्ता  होगा।
मौत जब तक इधर नहीं आती,
ज़िंदगी  से  न  तू  रिहा  होगा।
                                                  #विनोद सागर
परिचय: विनोद सागर लेखन क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। आपका जन्म ३ जनवरी १९८९ को जपला,पलामू में हुआ है। राजनीति शास्त्र में बी.ए.(आॅनर्स) करने के बाद आपकी साहित्य साधना और बढ़ गई। वर्तमान में आप एक साहित्यिक संस्था का दायित्व जपला, पलामू में ही निभा रहे हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं संकलनों में आपकी रचनाएँ सतत प्रकाशित होती रहती हैं। गंगा-गंगा (कविता-संग्रह), मुखौटा (कविता-संग्रह), त्रासदी (कविता-संग्रह), यादों में तुम (कविता-संग्रह) एवं निर्भया की माँ (कविता-संग्रह) आपके नाम प्रकाशित हैं। ‘मुखौटा’ का मराठी अनुवाद भी हुआ है। इधर,-तनहा सागर (ग़ज़ल-संग्रह), कुछ तुम कहो-कुछ मैं कहूँ (कविता-संग्रह), तथा मैं फिर आऊँगा (कविता-संग्रह) शीघ्र ही प्रकाशित होंगे। कुछ वार्षिक-अर्द्ध वार्षिक पत्रिकाओं का आपने सम्पादन भी किया है। २०१४ में दुष्यंत कुमार सम्मान, २०१५ में सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ सम्मान, कविश्री सम्मान, संपादन श्री सम्मान एवं झारखंड गौरव सम्मान भी २०१६ में मिला है। आपको मातृभाषा हिन्दी सहित भोजपुरी एवं मगही भाषा भी आती है। कहानी, लघुकथा, उपन्यास, गीत, ग़ज़ल, छन्द, दोहा, मुक्तक, कविता, हाइकु, क्षणिका, व्यंग्य, समीक्षा,आलेख आपके लेखन का क्षेत्र है। निवास झारखंड के जपला, पलामू में है ।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।