प्रेम

vijayanand
एक क्रूर राजा था। उसने राज्य में संगीत,कला और प्रेम करने पर प्रतिबंध लगा रखा था। उसके दरबार में एक युवा राजकवि था। सुंदर-सुंदर कविताएँ रचता था। राजकुमारी उसकी कविता,सादगी,सुंदरता व प्रतिभा पर मोहित थी। राजा को इसकी भनक लग गई। क्रोधित हो उसने राजकुमारी को महल में नजरबंद कर दिया और राजकवि को ढूँढ़कर उसे प्राणदंड देने का आदेश सेनापति को दिया। सेनापति उनके पवित्र प्रेम का साक्षी था,मगर राजा का आदेश मानना उसकी बाध्यता थी।
पूरे राज्य में मुनादी करा दी गई। राजकवि की तलाश शुरु हो गई,पर वह कहीं नहीं मिला। राजा का क्रोध और बढ़ गया। अंतत: उसने राजमहल की तलाशी लेने का निश्चय किया। रात्रि में सेनापति और सैनिकों की टुकड़ी के साथ पूरे राजमहल की घेराबंदी करवा दी गई। एक-एक कक्ष की तलाशी शुरु हुई। किसी कक्ष में कोई नहीं मिला। अब एक आखिरी कक्ष शेष बचा था। सेनापति ने उस कक्ष का दरवाजा खोला,तो कोने में दीपक की लौ में उसे दो परछाईंयाँ नजर आईं। निश्चिंतता की सांस लेते हुए उसने राजा से कहा-`यहाँ भी कोई नहीं है,महाराज।` राजा सेनापति और सैनिकों को लेकर चला गया।
उस कक्ष से एक गुप्त रास्ता राज्य के बाहर जंगलों में खुलता था। राजकवि और राजकुमारी उस रास्ते बाहर निकल गए।परंपरा,क्रूरता और संवेदनहीनता की कठोर,पथरीली चट्टान का सीना चीर कर प्रेम ने अपनी जमीन तलाश ली थी। जवां दिलों में पलने वाला निश्चल प्रेम उसी दिन से राजसत्ता और दीन-दुनिया के बंधनों से आजाद हो गया थाl

                                                                                  #विजयानंद विजय

परिचय : लेखक विजयानंद विजय बक्सर (बिहार)से बतौर स्वतंत्र लेखक होने के साथ-साथ लेखन में भी सक्रिय है |

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।